दम तोड़ रही होली बढ़ाने की परंपरा
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माघ पूर्णिमा को नगर और गांवों में हालांकि पूजा के साथ होली रखी गई लेकिन इसके बाद एक माह तक होली पर लकड़ियां आदि रखने की परंपरा टूटती जा रही है। होलिका दहन की परंपरा भले ही बरकरार हो पर अब पहले की तरह होली बढ़ाने के प्रति लोगों में उत्साह नदारद होता जा रहा है। होलिका दहन के लिए कुछ कंडे या लकड़ियों के कुछ टुकड़े तो नजर आ जाएंगे, पर होली बढ़ाते युवा नजर नहीं आते।
पिछले दिनों माघ पूर्णिमा पर नगर के विभिन्न स्थानों पर होली रखी गई थी। इसके ठीक एक माह बाद होलिका दहन किया जाएगा। दुबे कंपाउंड निवासी प्रमोद दुबे बताते हैं कि एक जमाना था जब माघ की पूर्णिमा पर होली रखने के साथ ही उस पर लकड़ियां आदि रखने की युवाओं में होड़ लग जाया करती थी। अब यह सब गुजरे जमाने की बातें हो चली हैं। इसके पीछे जहां नगरों और कस्बों में पेड़ों का अभाव है। वहीं अब युवाओं को इन कामों में रुचि भी नहीं रह गई है।
वहीं स्टेशन रोड पर चाय बनाने वाले महेश कहते हैं कि होलिका दहन की रात कुछ इलाकों में युवा होली बढ़ाने के किए इधर-उधर से लकड़ी उठा कर रखने की जुगत में रहते हैं। हर बार दुकानों आदि की दस्तक, तख्त आदि रात में गायब कर होली पर रख दिए जाते हैं। ग्रामों में भी अब होली बढ़ाने की परंपरा पर विराम सा लगता जा रहा है।
पेड़ों की कमी भी वजह
मैनपुरी (ब्यूरो)। शहर में पेड़ों की कमी ने भी होली बढ़ाने की परंपरा पर काफी असर डाला है। शहरी क्षेत्रों में पेड़ न मिलने और हरे पेड़ों की कटाई पर रोक लगने के कारण भी होली बढ़ाने के प्रति लोगों की रुचि कम हुई है। वहीं लकड़ी की आसमान छूती कीमतें भी होली बढ़ाने की परंपरा पर विपरीत प्रभाव डाल रही हैं। वर्तमान में 250 रुपये मन चल रही है।
जिले में 2107 स्थानों पर होगा होलिका दहन
थाना क्षेत्रों में होलिका दहन के स्थल
करहल 205
बरनाहल 93
कुर्रा 172
घिरोर 173
औंछा 132
कोतवाली 214
बिछवां 86
कुरावली 63
भोगांव 165
बेवर 294
एलाऊ 212
किशनी 135
दन्नाहार 163
नोट: यह आंकड़े पिछले वर्ष के हैं