देहात में खेल प्रतिभाओं को निखारने वाले पायका मैदान बदहाली के शिकार हैं। खेलों को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए पायका मैदान अस्तित्व ही खो चुके हैं। योजनाएं बनती और बदलती रहीं मगर इनके रख रखाव पर ध्यान नहीं दिया गया है। अब इन मैदान के विकास का जिम्मा मनरेगा को सौंपा है।
पायका योजना वर्ष 2004 में समाप्त कर दी गई। उस समय बनाए गए क्रीड़ा श्री के पद भी समाप्त कर दिए गए। उन्हें केवल 500 रुपये मानदेय मिलता था जो उनके अनुसार अपर्याप्त था। बाद में शुरू की गई राजीव गांधी खेल अभियान योजना भी बदहाली का शिकार हो गई। योजना लागू होने के बाद विभाग को बजट ही नहीं मिला। नतीजा यह हुआ कि पायका के मैदान बदहाल होते चले गए। ग्रामीण क्षेत्र की युवा प्रतिभाएं बजट के अभाव में कुंठित होती चली गईं। पायका मैदानों का अस्तित्तव ही समाप्त होता जा रहा है।
जिले के 118 पायका मैदान में से 115 ग्राम स्तरीय तथा तीन ब्लाक स्तरीय हैं। जिनके विकास की जिम्मेदारी अभी तक ग्राम सभाओं की थी। मनरेगा के जरिए अब पायका मैदानों का विकास कराया जाएगा। पायका मैदानों की विकास खंड वार सूची मनरेगा उपायुक्त को भेजी गई है।
खेलकूद कार्यक्रम, पीआरडी, युवक मंगल दल, युवक मंगल महिला दल, पायका, राजीव गांधी खेल अभियान योजना, जनजागरूकता कार्यक्रम, सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसी योजनाएं विभाग के पास हैं। कार्यक्रम और पायका मैदान बजट न मिलने से बदहाल होते जा रहे हैं।
- बलवीर सिंह यादव, क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी