देवी रोड स्थित खानकाहे मोहम्मदिया अफजलिया के सज्जादा नशीं हाजी हामिद अली शाह की चेहल्लुम की फातिहा में मुरीदों और समर्थकों का जन सैलाब उमड़ा। कई खानकाह के सज्जादानशी ने फातिहा पढ़ी और उनकी जीवन पर प्रकाश डाला। इसके बाद लोगों को लंगर तकसीम किया गया।
दोपहर दो बजे जौहर की नमाज के बाद खानकाहे मोहम्मदिया अफजलिया में हाजी सूफी मौलवी हामिद अली शाह कादरी चिश्ती की चैहल्लुम की फातिहा हुई। फातिहा में दिल्ली, मुरादाबाद, कानुपरी, इटावा, फीरोजाबाद के मुरीदों ने शिरकत की। इसके बाद हजारों मुरीदों को लंगर तकसीम किया गया। दो दो बजे के बाद शुरू हुआ लंगर देर शाम तक चला।
लंगर के बाद रान नौ बजे जलसा ईदमीलादुन्नवी का आयोजन किया गया। इसमें उलेमाओं ने कहा कि अब्बा मियां इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म मानते थे। उनका कहना था कि सभी धर्मों से मोहब्बत करनी चाहिए। यही कारण है कि आज सभी धर्मों के लोग उनकी याद आंख नम कर लेते हैं। इस मौके पर रदौली शरीफ के सज्जादानशी सुग्गू मियां, मुरादाबाद खानकाह के सज्जादानशी मुस्ताक हुसैन, सज्जादानशी हाजी हासिम अली, बबलू मियां, नदीम इलाही, मोहम्मद असलब बॉबी, अली हसन, अली हुसैन, अशफाक, एजाज आदि मौजूद थे।