सरकार कितना भी परिषदीय विद्यालयों की पढ़ाई पर खर्च करे, लेकिन विभाग के ही लोग उसे सफल नहीं होने दे रहे हैं। शिक्षक स्कूल को ही घर बनाए बैठे हैं। इसकी पोल डीसी एमडीएम द्वारा गत दिवस किए निरीक्षण में खुली। निरीक्षण के दौरान 11 में से पांच स्कूल बंद मिले। इसकी रिपोर्ट डीसी ने प्रभारी बीएसए भारती शाक्य को सौंपी है।
डीसी एमडीएम नितिन भार्गव ने 11 परिषदीय स्कूलों का निरीक्षण किया। वह सबसे पहले बरनाहल ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय बोटपुर पहुंचे। यहां प्रधानाध्यापक अनुपस्थित मिले। वहीं पाया कि शिक्षक लोकेंद्र सिंह स्कूल में ही अपना घर बनाए हैं। जिस कमरे में बच्चों की पढ़ाई होनी चाहिए उस कमरे में सिलेंडर, चूल्हा, मसाले, नाश्ता, बिस्तर आदि लगा हुआ था। ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षक लोकेंद्र सिंह स्कूल में ही रहते हैं। इस कारण बच्चे कम ही पढ़ने आते हैं। जबकि विद्यालय में 90 बच्चे पंजीकृत हैं। मौके पर एक भी नहीं मिला। किचिन गंदी पड़ी थी। खाद्यान्न में मकड़ी का जाला लगा था। मसाले आदि भी नहीं थे।
इससे बाद वह प्रावि नौरमई पहुंचे यहां उन्हें उपस्थिति रजिस्टर में बच्चों की अनुपस्थिति नहीं चढ़ी मिली। साथ ही रसोइया ने बताया कि उसे एक वर्ष से मानदेय नहीं मिला है। इस पर इंचार्ज को नोटिस जारी किया। वहीं प्राथमिक विद्यालय दिहुली, घिरोर के प्रावि नगला भारा, साहिदाबाद, नगला बूंचा आदि बंद मिले। वहीं उप्रावि और प्रावि में एक साथ एमडीएम बनता मिला। इस पर अलग-अलग बनाने के निर्देश दिए। वहीं प्रावि नगला बरी बंद मिला। प्रावि इकहरा, प्रवि मधुपुरी में सबकुछ सही मिला।