मैनपुरी। चतुर्वेदी समाज की होली पारंपरिक और अद्भुत है। होली का उत्सव करीब 300 वर्ष पुरानी अपनी अनूठी परंपरा और संस्कृति को संजाेये हुए है। मोहल्ला चौथियाना में भगवान श्रीकृष्ण के डोले के साथ होली की शुरुआत हो जाती है। 40 दिनों तक लगातार समाज के लोग अलग-अलग मंदिरों में होली गीत और फाग का गायन करते हैं।
मोहल्ला चौथियाना में चतुर्वेदी समाज के करीब 110 परिवार रहते हैं। समाज की ओर से आज भी वर्षों पुराने और अनूठे तरीके से होली का त्योहार मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन की तरह यहां भी बसंत पंचमी से उत्सव की शुरुआत हो जाती है। 40 दिनों तक चतुर्वेदी समाज के लोग परंपरानुसार पूरे उत्साह और उल्लास के साथ होली का उत्सव मनाते हैं।
समाज के लोगों ने बताया कि होली मनाने की यह परंपरा करीब 300 साल पुरानी है। 40 दिनों के होली उत्सव में पांच दिनों तक मोहल्लों की गलियां रंगों से सराबोर रहती हैं। बसंत पंचमी पर होली गीत और फाग गायन शुरू हो जाता है। रंगभरनी एकादशी पर भगवान बराह मंदिर से भगवान का डोला निकालता है और श्री श्याम सुंदर मंदिर में फूलों की होली खेलने के साथ गीत गाए जाते हैं।
पूर्णिमा पर निकाला जाएगा डोला
2 मार्च को पूर्णिमा के दिन मोहल्ला सौतियाना स्थित श्रीदाऊजी महाराज मंदिर से भगवान का डोला निकलेगा। डोला कृष्णा टॉकिज के समीप स्थित प्राचीन भगवान श्रीगणेश जी मंदिर तक जाता है। 4 मार्च को भगवान के डोले की वापसी के साथ होली उत्सव का विश्राम होगा।
इन मंदिरों में होता है फाग गायन
होली उत्सव के तहत समाज के लोग प्रतिदिन भगवान वराह मंदिर, नवनीत प्रिया मंदिर, श्रीबिहारी मंदिर, प्राचीन श्री हनुमान महाराज मंदिर, प्राचीन श्रीदाऊ मंदिर, श्रीश्याम सुंदर मंदिर में होली गीत और फाग गायन करते हैं। होली के बाद कंस के मैदान में कंस के पुतले का दहन होता है और मेला का आयोजन किया जाता है।
चतुर्वेदी समाज की ओर से आज भी वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वाह्न करते हुए होली का उत्सव मनाया जाता है। समाज का होली उत्सव भगवान और भक्त के बीच अटूट प्रेम का प्रमाण है। - मनोज चतुर्वेदी
चतुर्वेदी समाज के लोगों में होली उत्सव को लेकर विशेष उत्साह दिखाई देता है। परंपरा को आगे बढ़ाते हुए युवा भी होली गीत और फाग गायन में रूचि दिखा रहे हैं, ये अच्छा संकेत है। - मनोज मिश्रा
मोहल्ला चौथियाना की होली धार्मिक और पारंपरिकता को अनूठा मिश्रण है। भगवान श्रीकृष्ण के डोले के साथ होली उत्सव की शुरुआत होती है और डोले की वापसी तक होली चलती है। - साकेत चतुर्वेदी
शहर के विभिन्न मंदिरों में होली गीत और फाग गायन गाए जाते हैं। 40 दिनों तक चतुर्वेदी समाज के लोग इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। यह परंपरा आगे भी निरंतर जारी रहेगी। - संजय चतुर्वेदी
फोटो 13 मनोज चतुर्वेदी।- फोटो : मिहींपुरवा के नवीन गल्लामंडी परिसर में सामूहिक विवाह में मौजूद युगल।
फोटो 13 मनोज चतुर्वेदी।- फोटो : मिहींपुरवा के नवीन गल्लामंडी परिसर में सामूहिक विवाह में मौजूद युगल।
फोटो 13 मनोज चतुर्वेदी।- फोटो : मिहींपुरवा के नवीन गल्लामंडी परिसर में सामूहिक विवाह में मौजूद युगल।