ईशन नदी में सिल्ट जमा होने और सफाई नहीं होने से इसकी तलहटी उथली होती जा रही है। नदी की गहराई 40 फीट होती थी लेकिन सिल्ट जमा होने से इसकी गहराई 20 फीट ही रह गई है। यही कारण है जब अधिक बारिश होती है नदी के आसपास जलभराव की स्थिति हो जाती है। लोगों के कई बार कहने के बाद भी सफाई नहीं कराई, अगर यही हाल रहा जो जोरदार बारिश में हालात खतरे के निशान पर होंगे।
ईशन नदी जिले में करीब 134 किमी लंबाई में बहती है। इसके बहाव के रास्ते में अतिक्रमण किए जाने और दशकों से सिल्ट की सफाई न होने से नदी की तलहटी लगातार उथली होती जा रही है। इसके कारण इसकी पानी रोकने की क्षमता भी घटती ही जा रही है। गर्मी के दिनों में नदी में प्रयोग करने लायक भी पानी नहीं रहता है। नदी की सिल्ट की सफाई न होने का मुख्य कारण प्रशासनिक उदासीनता है। अधिकारियों के अनुसार 2012 में नदी की सफाई के लिए मात्र दस लाख रुपये शासन से आए थे। लेकिन यह पैसे अभी तक नदी की सफाई के लिए प्रयोग ही नहीं हुए। यह पैसा अभी तक अधिकारियों के खाते में पड़ा है। वहीं इसके बाद पिछले वर्ष अधीक्षण अभियंता रामगंगा कमांड सिंचाई विभाग कानपुर ने शासन को 89 करोड़ रुपये का ईशन नदी की सफाई करने का प्रस्ताव भेजा था। इससे नदी का चौड़ीकरण और सिल्ट सफाई किया जाना है। लेकिन यह प्रस्ताव भी अभी तक लंबित है। इसके चलते नदी की सफाई नहीं हो पा रही है।
जिले में शहर के बीच से गुजर रही ईशन नदी की बदहाली के लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं। चाहे नदी की जमीन पर अतिक्रमण की बात हो या फिर सिल्ट सफाई की। अधिकारियों की लापरवाही के चलते ही नदी अपना स्वरूप खोती जा रही है। अधिकारियों को चाहिए कि वो पुराना स्वरूप वापस लाने के लिए कार्रवाई करें। शहरवासियों को भी सहयोग करना चाहिए।
- प्रमोद दुबे बाबा, सामाजिक कार्यकर्ता
अधिकारियों के साथ ही शहरवासी भी नदी के बिगड़ते स्वरूप के लिए जिम्मेदार हैं। जो लोग नदी के संरक्षण के लिए जिम्मेदार हैं उनमें से ही कई ने नदी में अतिक्रमण कर मकान दुकानें बना ली हैं। इसके लिए आम लोगों को भी आगे आना होगा। तभी नदी का अस्तित्व बच सकेगा।
- लल्ला चौबे, समाजसेवी
नदी के पुराने स्वरूप को वापस लाने के लिए और इसमें वर्ष भर पानी बहता रहे इसके लिए अधिकारियों और शहरवारियों को इमानदारी से प्रयास करने होंगे। केवल बातों से कुछ नहीं होने वाला। कुछ कार्रवाई करने पर ही परिणाम सामने आएंगे।
- हरदीप सिंह, व्यवसायी