सहालग की धूम पर गर्मी का मौसम हावी है। गर्म हवा के थपेड़े, तपती राह और आसमान से आग बरस रही है। ऐसे में विवाह समारोह भी किसी चुनौती से कम नहीं हैं। आए-जाए बिना भी तो काम नहीं चलता बस यही जुमला हर किसी की जुबान पर है जो विवाह समारोह में शामिल होने के लिए मजबूर कर देता है।
गर्मी के तीखे तेवरों ने सभी को बेहाल कर रखा है। जरूरी कार्य से घरों से निकलने वाले लोग चेहरा अंगोछे आदि से ढककर निकल रहे हैं। लोग सामान की खरीदारी के लिए बाजारों में घूमते हैं तो उनके चेहरे तेज धूप से सुर्ख लाल से दिखाई देते हैं। महिलाएं अपने सिर को ओढ़नी या साड़ी के पल्लू से ढककर स्वयं को धूप से बचाती हैं। सहालग के कारण बस स्टैंड पर भारी भीड़-भाड़ दिखाई देती है। लोग वाहनों के इंतजार में और गंतव्य स्थान की दूरी तय करने में गर्म हवाओं के थपेड़े खाते हैं। ऐसे में दूर-दूर तक पानी न मिले तो तड़पने की स्थिति हो जाती है।
गर्मी के प्रकोप से शादियों में बनाया गया भोजन करना भी दुश्वार होता है।
जिला अस्पताल के डा. पीके झा के अनुसार इतनी देरी से खिलाया जाने वाला खाना नुकसानदेह होता है। गर्मी में रोग से लड़ने की शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है। इसलिए ताजा भोजन ही करना चाहिए। गर्मी में वनस्पति या तेल से बनी पूड़ी आदि खाने के कारण रोगों के फैलने की आशंका बढ़ जाती हैं।
अधिकतम तापमान रहा 41.6 डिग्री सेल्सियस
तापमान में निरंतर हो रही वृद्धि से जनजीवन बेहाल हो चला है। गर्मी के तेवर तीखे हो चले हैं। सोमवार को सुबह के समय आसमान में बदली छाने से गर्मी से कुछ राहत मिली थी लेकिन दोपहर बाद फिर चटख धूप और गर्म हवाओं ने पसीने छुड़ा दिए। देर शाम तक लोग भीषण गर्मी से परेशान रहे। अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि न्यूनतम तापमान 24.4 डिग्री सेल्सियस रहा।
जिला अस्पताल में 100 बेड भी कम पड़े
दिन व दिन बढ़ रही गर्मी के चलते संक्रामक रोगों से पीड़ित रोगियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। सोमवार को जिला अस्पताल में एक हजार से अधिक रोगी पहुंचे। इनमें से गंभीर हालत में 105 को भर्ती कराया गया। इसके चलते जिला अस्पताल में स्थित 100 बेड भी कम पड़ गए।
जिले में संक्रामक रोगों का कहर बढ़ता ही जा रहा है। इसके चलते सोमवार को जिला अस्पताल में 1023 रोगी विभिन्न रोगों से पीड़ित पहुंचे। इसके चलते पर्ची काउंटर से लेकर दवा वितरण तक रोगियों की लंबी लाइन लगी नजर आईं। वहीं इनमें से डायरिया, बुखार विभिन्न रोगों से गंभीर हालत देख 105 रोगियों को भर्ती कराया गया। इसके चलते 100 बेड के जिला अस्पताल में जगह ही कम पड़ गई। रोगी अधिक आने के चलते हृदय रोग विभाग में रोगियों को शिफ्ट कराया गया। ताकि रोगियों को कोई परेशानी न हो। वहीं स्वास्थ्य विभाग कान में तेल डाले बैठा हुआ है। अभी तक जिला अस्पताल में एक भी एक्सट्रा काउंटर नहीं खोला गया है। इससे रोगियों को लंबी लाइन में लगकर दवा लेनी पड़ रही है। वहीं जिला अस्पताल में कंट्रोल रूम भी नहीं खोला गया है।