आपराधिक मामलों में जेल भेजे जाने वाले आरोपियों को कोर्ट से रिमांड देते समय अब हर कोर्ट में रिमांड अधिवक्ता मौजूद रहेंगे। राज्य विघिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर दीवानी न्यायालयों में रिमांड अधिवक्ता नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
आपराधिक घटनाओं के बाद पुलिस आरोपियों को जेल भेजने से पहले कोर्ट में पेश करती है। कोर्ट से आरोपियों का 14 दिन का रिमांड स्वीकृत कर जेल भेजा जाता है। रिमांड के समय कोर्ट में जज, मजिस्ट्रेट, कोर्ट मुहर्रिर, सरकारी वकील मौजूद रहते हैं। अब कोर्ट में रिमांड अधिवक्ता भी मौजूद रहेंगे। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने दीवानी न्यायालयों में अब रिमांड अधिवक्ता नियुक्त करने का निर्णय लिया है। प्राधिकरण की सदस्य सचिव जी श्रीदेवी ने विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को पत्र भेजकर रिमांड अधिवक्ताओं की तैनाती करने को कहा है। प्राधिकरण के सचिव अजय कुमार सिंह ने प्राधिकरण के अध्यक्ष उमेश कुमार शर्मा के निर्देश के बाद रिमांड अधिवक्ता नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दीवानी न्यायालयों में दो दर्जन से अधिक रिमांड अधिवक्ता नियुक्त किए जाएंगे। जिनमें महिला अधिवक्ताओं को भी शामिल किया जाएगा।
दो दर्जन वकीलों ने किए आवेदन
मैनपुरी। दीवानी न्यायालय में वकालत करने वाले अधिवक्ताओं में से दो दर्जन से अधिक अधिवक्ताओं ने रिमांड अधिवक्ता बनने के लिए आवेदन जमा कर दिए हैं। इसी माह दो दर्जन से अधिक रिमांड अधिवक्ताओं की नियुक्ति हो जाने की संभावना है।
महिला संख्या कम रहने की संभावना
मैनपुरी। रिमांड अधिवक्ता के रूप में महिला वकीलों की संख्या कम रहने की संभावना है। दीवानी में वकालत करने वाली पंजीकृत महिला वकीलों की संख्या केवल दस है। इनमें से तीन महिला वकील रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भी वकालत नहीं करती हैं। तीन महिला वकील मीडिएशन सेंटर की सदस्य हैं। शेष महिला वकीलों में से ही रिमांड अधिवक्ता की नियुक्ति की जाएगी।