श्रीदेवी मेला एवं ग्राम सुधार प्रदर्शनी के कादंबरी रंगमंच पर स्थानीय प्रतिभा दिवस एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें स्थानीय कवियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। स्थानीय कवियों ने देर रात तक काव्य पाठ किया। खेल, शिक्षा, साहित्य, संगीत के क्षेत्र में नाम रोशन करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।
कादंबरी रंगमंच पर कैलाश चंद्र तिवारी के संयोजन में हुए कार्यक्रम का उद्घाटन राजा अरविंद कुमार सिंह, जिला जज उमेश कुमार शर्मा ने फीता काटकर किया। कवि सम्मेलन में कंचन माहेश्वरी ने मां सरस्वती वंदना, गिरीश चंद्र निराला ने ‘जिन्होंने जान देकर के ये हिंदुस्तान सींचा है, चाहे हिंदू सिख मुस्लिम सभी का ये बगीचा है।’ पूरन सिंह पूरन ने ‘वोट हेतु नोट के जो कमरे भरे हुए थे, ऐसी पड़ी चोट कि लंगोट गीले हो गए।’ शिवसिंह निसंकोच ने ‘गीत हमने हमेशा उन्हीं के लिखे, जिनकी आंखों में आंसू छलकते दिखें।’ डा. मनोज सक्सेना ने ‘बिन बेटी सूना घर आंगन, सूना सब संसार, फिर बेटी पर क्यों होते इतने अत्याचार।’ संजय दुबे ने ‘मन की गांठें खुली नहीं मतलब का अभिनंदन है, रोज टूटता रोज है जुड़ता ये कैसा गठबंधन है।’ दुर्गेश भदौरिया ने ‘सजाएं गम हमें हर पल दुखों की ये कहानी है, न राजा न ही रानी है इस बेबस की कहानी है।’ यश भारती से सम्मानित दीन मुहम्मद दीन, राशिद राहत, चंद्र मोहन शर्मा, भूपेंद्र सिंह, शरदचंद्र अग्रवाल टेसू, आचार्य गुरुदास, दिनेष शास्त्री, धर्मेंद्र सिंह धरम, ऊषा त्रिपाठी आदि ने काव्य पाठ किया। अध्यक्षता मुक्तक सम्राट लाखन सिंह भदौरिया सौमित्र ने तथा संचालन बदन सिंह मस्ताना ने किया। एडीएम एके श्रीवास्तव, नगर पालिका अध्यक्ष साधना गुप्ता, एसडीएम सदर अमित कुमार, डा. सुमंत गुप्ता को सम्मानित किया गया। किशन दुबे, सुखवीर सिंह यादव, एस साराभाई, संजीत गौड़, डा.चंद्र मोहन सक्सेना, मनीश तापड़िया आदि मौजूद थे। संचालन पूर्व प्रधानाचार्य जेसी त्रिपाठी व साकिब अनवर चिश्ती ने किया।