नोटबंदी का सहकारी बैंक पर भी पड़ा असर
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भारतीय रिजर्व बैंक ने जिला सहकारी बैंकों को 500 और 1000 के नोट बदलने से रोक दिया है। जिसके चलते सहकारी समितियों पर रखे 57.80 लाख रुपये बैंक में जमा नहीं हो पा रहे हैं। ऋण वसूली और खाद की बिक्री भी नहीं हो पा रही है। यह बातें जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष डॉ. रामकुमार यादव ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहीं।
गुरुवार को जिला सहकारी बैंक परिसर में वार्ता करते हुए उन्होंने कहा जिले में सहकारी बैंक की 14 शाखाएं काम कर रही हैं। इन शाखाओं से 58 समितियां संबद्ध हैं। जिन समितियों में 29140 सदस्य हैं। बैंक का कुल जमा 12121.91 लाख रुपया है। बैंक में 159986 खाताधारक हैं। जिला सहकारी बैंक ग्रामीण बैंक से जुड़ी संस्था है। 18465 सदस्य ऐसे हैं जिनका अन्य बैंकों में खाता नहीं है। सहकारी समितियों द्वारा सदस्यों को जो कर्जा बांटा गया था उसके सापेक्ष समितियों पर 57.80 लाख रुपये की वसूली हुई है।
रिजर्व बैंक द्वारा सहकारी बैंक को 500 और 1000 के नोट जमा करने और बदलने से रोकने के बाद समितियों पर जमा 57.80 लाख रुपये बैंक में जमा नहीं हो पा रहे हैं। बैंक की ऋण वसूली और खाद की बिक्री भी नहीं हो पा रही है। जिसके चलते बैंक से संबंधित लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैंक का करोड़ों का लोन भी फंसा हुआ है। सरकार और रिजर्व बैंक के निर्णय के विरोध में सहकारी बैंककर्मी 25 नवंबर से विरोध करते हुए आंदोलन करेंगे।