शहर के सेंटीनियल चर्च में रविवार सुबह से ही लोगों ने एक दूसरे को गले लगा हैप्पी क्रिसमस, मेरी क्रिसमस कहकर बधाई दी। घरों और चर्च में सुंदर सजावट और सेंटा के फोटो लगे रहे। यीशु के जन्म के गीत गाए और आतिशबाजी की।
सेंटीनियल चर्च में आयोजित प्रार्थना सभा में पादरी सुशील कुमार ने कहा कि प्रभु यीशु का जन्म शांति का प्रतीक है। शांति के लिए उन्होंने जीवन भर प्रयास किए। संसार के ऐसे लोग जो मृत्यु दंड पाने को हैं वे आज के दिन यीशु की प्रार्थना करें। प्रार्थना सभा के बाद इसाई धर्म के लोगों ने एक दूसरे को गले लगाकर क्रिसमस की बधाई दी और खुशियां मनाईं।
शनिवार रात 12 बजे यीशु के जन्म लेते ही बाइबिल का पाठ हुआ। क्रिसमस पर चर्च के अलावा कान्वेंट स्कूलों और घरों को बिजली के रंग-बिरंगे बल्ब से सजाया गया। पेड़ों पर भी छोटे-छोटे बल्बों को जलाकर रोशनी की गई। रोशनी से सजा चर्च आकर्षक का केंद्र बना रहा। चर्च में प्रभु यीशु के जन्म से संबंधित मसीह गीत गाए गए। प्रार्थना सभा में सभी धर्मों के लोगों ने चर्च पहुंचकर भाग लिया। प्रार्थना सभा के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर मेरी क्रिसमस की बधाईयां दी। इसके बाद महिलाओं और बच्चों ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। दोपहर में सामूहिक भोजन का आयोजन हुआ।