शिकोहाबाद-फर्रुखाबाद रेल लाइन पर ग्राम रठेरा के समीप रेल विभाग द्वारा बंद की जा रही रेलवे क्रासिंग को लेकर क्षेत्रीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। रठेरा समेत पांच गांवों के ग्रामीणों ने विरोध में शिकोहाबाद से फर्रुखाबाद जाने वाली पैसेंजर ट्रेन को रोक लिया। ग्रामीणों ने एक घंटा 22 मिनट तक ट्रेन को रोके रखा। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ खंड अभियंता रेल, एसडीएम और कई थानों की पुलिस द्वारा समझाने और क्रासिंग बंद नहीं किए जाने के आश्वासन के बाद ही ग्रामीणों ने ट्रेन को मैनपुरी की ओर रवाना होने दिया।
शिकोहाबाद-फर्रुखाबाद रेलवे लाइन पर स्पीड बढ़ाने के साथ रेल विभाग द्वारा मानव रहित क्रासिंग पर अंडर पास बनाए जा रहे हैं। वहीं कुछ क्रासिंग बंद भी की जा रही हैं। मैनपुरी-सिरसागंज रोड पर ग्राम टिंडौली के समीप रेलवे क्रासिंग पर रेल विभाग ने फाटक लगाने को हरी झंडी दे दी है। लेकिन उससे करीब एक किमी आगे रठेरा और बरौली की रेलवे क्रासिंग को बंद किया जा रहा है। इन दोनों क्रासिंग के संपर्क मार्गों के समानांतर रेल विभाग ने पक्की सड़क टिंडौली क्रासिंग तक बनाई है।
रविवार को सुबह रठेरा रेलवे क्रासिंग को बंद किया जाने लगा तो ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। रठेरा, नगला हिम्मत, नगला कोंडर, नगला छेड़ी, नेकापुर के ग्रामीण क्रासिंग पर एकत्रित हो गए और क्रासिंग को बंद करने का काम बंद करा दिया। इसी दौरान शिकोहाबाद की ओर से पैसेंजर ट्रेन आने का समय हुआ तो ग्रामीणों ने क्रासिंग के कुछ आगे रेलवे लाइन पर बड़े-बड़े पत्थर डाल दिए और सुबह 9:20 पर लाल कपड़ा दिखाकर ट्रेन को रुकवा लिया। इसके बाद ग्रामीण प्रदर्शन करने लगे। सूचना रेलवे के अधिकारियों और पुलिस को दी गई। ट्रेन रोके जाने की सूचना पर वरिष्ठ खंड अभियंता रेल सुनील यादव, एसडीएम सदर एसएन यादव, जीआरपी, दन्नाहार, घिरोर, बरनाहल के थाना प्रभारी और पुलिस मौके पर पहुंच गई। ग्रामीणों का कहना था कि क्रासिंग बंद होने से किसानों, स्कूली बच्चों को खासी दिक्कत उठानी पड़ेगी। अधिकारियों द्वारा काफी समझाने और क्रासिंग को बंद न किए जाने के आश्वासन के बाद ही ग्रामीणों ने 10:42 बजे ट्रेन को आगे बढ़ने दिया। ग्रामीण राकेश यादव, विनोद कुमार, दिनेश कुमार, कुंदन सिंह, किशनपाल, कृपाल सिंह, जवाहरलाल आदि ने उपखंड अभियंता रेल को क्रासिंग बंद न किए जाने से संबंधित ज्ञापन दिया।
डर के चलते यात्रियों ने बंद की खिड़कियां
निर्जन स्थान पर एक घंटे से अधिक समय तक ट्रेन रुके रहने से यात्रियों खासकर महिलाआें और बच्चों को परेशानी उठानी पड़ी। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए यात्रियों ने डिब्बों के गेट और खिड़कियां बंद कर लीं। ट्रेन चलने पर यात्रियों ने राहत की सांस ली।