ज्योति रोड स्थित निरंकारी परिसर में रविवार को सत्संग हुआ। इसमें गुरु गद्दी पर विराजमान संत रामभरत ने कहा कि मानव मात्र की सेवा में संत, भक्त जन महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
संत रामभरत ने कहा कि महापुरुष जाति, धर्म व भेदभाव से ऊपर उठकर संपूर्ण मानवता को सुख पहुंचाने का जतन करते हैं। संत ने कहा कि अहंकार करने से ही सारी बुराइयां पैदा होती हैं। नफरत की जगह प्रेम को पैदा करें। उन्होंने कहा कि ब्रह्मांड में दुनिया का उद्धार गुरु की करता है।
संत ने कहा कि आज के बच्चों को अपने से बड़ों का आदर करना सिखाएं। आज के बच्चे पैर छूना तो दूर राम-राम भी नहीं बोलते। संत मंडली में आए चंद्रपाल ने कहा कि सब दिन जात
न एक समान, संतोष जगदीश ने कहा कि मेरे भाई जरा यह समझ ले कि जिंदगानी का कोई भरोसा नहीं। इसके अलावा राधा, मीना, नेहा, हेमा आदि ने भी भजन प्रस्तुत किए। अंत में जिला प्रमुख पुष्पा कालरा ने बताया कि 18 जुलाई को दिल्ली के गुरु दरबार से संत महेश आ रहे हैं। यह शाम चार बजे से छह बजे तक प्रवचन करेंगे।