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Mainpuri News: डीएपी ने मिट्टी को किया बीमार, फसल खराब, किसान लाचार

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मैनपुरी। किसानों को कम समय में अच्छी फसल और कम मेहनत में ज्यादा फसल की चाहत है, इसके लिए अंधाधुंध उर्वरकों का उपयोग किया जा रहा है। उनकी ये चाहत मिट्टी की सेहत को बीमार कर रही है। इससे जहां किसानों की फसल बर्बाद हो रही है, वहीं धीरे-धीरे मिट्टी भी बंजर होती जा रही है। जनपद में मिट्टी का पीएच लेवल न्यूनतम 4.5 तक जा चुका है।
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जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शिवराज सिंह ने बताया कि किसान मिट्टी में अधिक फसल की चाहत में रासायनिक खाद का प्रयोग अत्यधिक मात्रा में कर रहे हैं, इससे मिट्टी की सेहत खराब हो रही है। जो मिट्टी अच्छी फसल दे सकती है, उसमें पौधों का उगना ही बंद हो रहा है। जमीन की उर्वरक क्षमता लगातार कम होती जा रही है।

उन्होंने बताया कि अनाज में गेहूं, जौ, तिलहन और दलहनी फसलों में चना, मसूर, अरहर, मूंग, उड़द शामिल हैं। दोनों तरह की फसलों में रासायनिक खाद डालने के अनुपात तय किए गए हैं। इसके अनुसार अच्छी और बेहतर किस्म की फसल मिल सकती है। अनाज वाली फसलों में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का प्रयोग 4-2-1 के अनुपात में और दलहनी फसलों में 2-4-1 के अनुपात में किया जाता है। इसे संतुलित उर्वरक भी कहा जाता है। वहीं किसान खेतों में इस अनुपात के सापेक्ष ढाई गुना ज्यादा यूरिया, डेढ़ गुना ज्यादा डीएपी और सवा गुना ज्यादा पोटाश का प्रयोग कर रहे हैं। जिसे असंतुलित उर्वरक कहा जाता है।
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क्या हो रहा नुकसान

फसलों में तय मात्रा से ज्यादा यूरिया डालने पर मिट्टी की सेहत खराब हो रही है, उन्होंने बताया कि मिट्टी का पीएच लेवल 6.5 से 7.5 तक होना चाहिए, यह सामान्य लेवल है। वहीं अधिक यूरिया डालने की वजह से मिट्टी का पीएच लेवल न्यूनतम 4.5 पहुंच गया है। इससे मिट्टी अम्लीय हो जाती है और फसलों को नुकसान पहुंचने लगता है। वहीं अगर मिट्टी का पीएच लेवल 7.5 से ऊपर जाता है तो मिट्टी में सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे में उस मिट्टी में कोई भी फसल नहीं होगी और जमीन लंबे समय बाद बंजर हो जाएगी।
कार्बनिक पदार्थ हो रहा कम
कृषि वैज्ञानिक नरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि मिट्टी में तय मात्रा से ज्यादा रासायनिक खाद का प्रयोग करने से कार्बनिक पदार्थ की क्षमता कम हो जाएगी। मिट्टी में 0.8 कार्बनिक क्षमता होनी चाहिए। जनपद की मिट्टी की जांच करने पर पता चला है कि यहां कार्बनिक पदार्थ की क्षमता 0.3 से 0.1 है। इससे फसल को पोषक तत्व नहीं मिल पाते और ज्यादा मात्रा में फर्टिलाइजर देना पड़ता है। फर्टिलाइजर की मात्रा बढ़ाने की वजह से मिट्टी की नमी कम हो जाती है और इससे किसान को बार-बार सिंचाई करनी पड़ती है, ज्यादा सिंचाई होती है तो मिट्टी के पोषक तत्व काम हो जाते हैं और फसलों को नुकसान पहुंचने लगता है।

मिट्टी की करा सकते हैं जांच

किसान अपनी मिट्टी की जांच कृषि विज्ञान केंद्र में करा सकते हैं। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सुविधा मिलती है। इसके अनुसार उन्हें रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है, जिससे कम लागत में अधिक और सही उत्पादन किया जा सके।
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