मैनपुरी। बाजार में उचित दाम न मिलने के कारण किसानों को अब भंडारित आलू फेंकने की मजबूरी नहीं होगी। कोल्ड स्टोर में खराब होने वाले आलू को भी खुले में या सड़कों पर फेंकने के बजाय उससे सीएनजी तैयार की जाएगी। इसके लिए जिले में करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से सीएनजी प्लांट स्थापित करने की तैयारी है। प्लांट में रोजाना करीब 10 टन सीएनजी का उत्पादन हो सकेगा।
जिले में हर साल करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन आलू का कोल्ड स्टोरों में भंडारण होता है। इसमें करीब पांच से 10 प्रतिशत आलू खराब हो जाता है। वहीं, बाजार में कीमतें कम होने पर किसान कई बार कोल्ड स्टोर में रखा आलू निकालने के बजाय उसे फेंक देते हैं। इससे किसानों के साथ ही कोल्ड स्टोर संचालकों को भी नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं अब खराब आलू के निस्तारण के साथ किसानों को उसकी कीमत दिलाने के लिए सीएनजी प्लांट स्थापित किया जाएगा। इसमें सड़े आलू के अलावा गोबर, नेपियर घास और मक्का का इस्तेमाल कर मीथेन गैस तैयार की जाएगी। इसके बाद उसे सीएनजी में परिवर्तित किया जाएगा। प्लांट में रोजाना 10 टन गैस के उत्पादन के लिए करीब 300 टन कच्चे माल की आवश्यकता होगी। इसके लिए महाराष्ट्र और तमिलनाडु की कंपनियों से बातचीत चल रही है।
150 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदा जाएगा खराब आलू
जिला उद्यान अधिकारी राम सेवक पांडे के अनुसार, किसानों से खराब आलू करीब 150 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा। इससे जिस आलू को किसान कीमत न मिलने के कारण फेंकने को मजबूर होते थे, उसके भी उन्हें कुछ दाम मिल सकेंगे। साथ ही कोल्ड स्टोरों से खराब आलू के निस्तारण की समस्या भी कम होगी। इससे किसानों और कोल्ड स्टोर संचालकों, दोनों को लाभ मिलेगा।
गैस बनने के बाद तैयार होगी जैविक खाद
प्लांट में आलू, गोबर, नेपियर घास और मक्का से गैस तैयार करने के बाद बचने वाले अवशेष से जैविक खाद भी बनाई जाएगी। इसके लिए गीली खाद को सुखाकर तैयार किया जाएगा। तैयार जैविक खाद किसानों को बेची जाएगी। इसके अलावा कोल्ड स्टोर संचालकों के माध्यम से भी इसे किसानों तक पहुंचाने की योजना है।
मुनीम जी कोल्ड स्टोरेज में हुई बैठक
मुनीम जी कोल्ड स्टोर में जनपद के आलू उत्पादक किसानों और शीतगृह में भंडार आलू के संबंध में आलू से स्टार्च बनाने के साथ ही शीतग्रह में निकासी के बाद खराब हो रहे आलू से मीथेन गैस बनने के प्लांट की स्थापना से संबंधित वैज्ञानिक और कंपनियों की ओर से जानकारी दी गई। इसमें जनपद के शीतगृह स्वामियों एवं प्रगतिशील आलू उत्पादक कृषकों तथा मैसर्स आरडी सोलर एंड कॉस्ट्रक्शन कम्पनी लि. कानपुर के प्रतिनिधि हिमांशु त्रिपाठी व उनकी टीम ने आलू की इस समस्या के निस्तारण के लिए जनपद में मीथेन गैस (प्राकृतिक गैस) का प्लांट लगवाने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके अलावा स्टार्च उत्पादन उद्यम की स्थापना के बारे में बताया। न्यूनतम मूल्य के आलू को अच्छे दाम भी प्राप्त हो सकते है तथा सम्बन्धित उद्योग भी स्थापित हो सकता है। बाजार में स्टॉच की मांग दवा, तैयार खाद्य पदार्थ, कागज उद्योग एवं अन्य उद्यमों में किया जा रहा है। इस विषय पर शीतगृह स्वामियों, आलू उत्पादक किसान तथा कंपनियों से आये प्रतिनिधियों के मध्य विस्तार से चर्चा व संवाद किया गया।