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विपक्ष का बंद बेअसर, खुले रहे बाजार

Mon, 28 Nov 2016 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
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विपक्ष का बंद बेअसर, खुले रहे बाजार - फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के खिलाफ किया गया भारत बंद का आह्वान जिले में पूरी तरह से बेअसर रहा। कांग्रेस, भाकपा व गल्ला मंडी के व्यापारियों को छोड़ किसी भी दल और संगठन ने बंद का समर्थन नहीं किया। हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से बंद की आशंका के चलते पूरी व्यवस्था की गई थी।
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केंद्र सरकार के 500 और 1000 के नोट बंद करने के निर्णय के बाद से पूरे देश में करेंसी की कमी हो गई है। इसके चलते आम आदमी को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों की परेशानी को देखते हुए सोमवार को विपक्षी दलों ने भारत बंद की अपील की थी। इसे जिले के लोगों ने पूरी तरह से नकार दिया। शहर से लेकर देहात तक में बाजार पूरी तरह से खुले। अपवाद स्वरूप गल्ला मंडी बंद रही लेकिन उनका निर्णय चार दिन तक मंडी बंद करने का है। वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष संकोच गौड़ और अराधना गुप्ता के नेतृत्व में व भाकपा ने शहर में विरोध जुलूस निकाला। हालांकि इसको भी पार्टी कार्यकर्ताओं के अलावा अन्य किसी का समर्थन नहीं मिला।
कुसमरा में नोट बंदी के बाद विपक्षी दलों द्वारा केंद्र सरकार के खिलाफ भारत बंद का नगर के बाजार में कोई असर नही दिखा। नोट बंदी के चलते बाजार में खरीदार तो कम रहे लेकिन एक भी दुकान बंद नही हुई।
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भोगांव में कांग्रेस सहित आधा दर्जन पार्टियों की बंद की अपील को दुकानदारों ने नकार कर दिया। उल्लेखनीय है कि एक हजार व पांच सौ के नोटों को बंद  करने के विरोध में कांग्रेस व आधा दर्जन दलों ने 28 नवंबर को बंद की अपील की थी। नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष नितिन उमेश का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय से व्यापारियों को परेशानी तो हो रही है लेकिन हम बाजार बंदी का समर्थन नहीं करते हैं।


नोटों के बंद करने से परेशानी तो हो रही है लेकिन दुकानें बंद करने से आम आदमी को दोहरी तकलीफ होगी। केंद्र सरकार का निर्णय सही है इसलिए हमने अपनी दुकान बंद नहीं की है।
नीरज कुमार, व्यापारी

नरेंद्र मोदी का निर्णय सराहनीय है। इससे परेशानी तो हो रही है लेकिन कालेधन को साफ करने के लिए इसके अलावा कोई उपाय भी नहीं बचा था। यही कारण है कि तकलीफ होने के बाद हमने बंद का समर्थन नहीं किया है।
अजय कुमार, व्यापारी

नोट बंदी का अचानक लिया गया निर्णय जनहित में नहीं है। हालांकि इससे कालेधन पर जोरदार चोट हुई है। हमने इसलिए दुकान बंद नहीं की क्योंकि पूरा बाजार खुला हुआ है। मोदी का निर्णय निर्भीक है लेकिन परेशानी भरा भी है।
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टोनी, व्यापारी
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