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बजट के ‘गणित’ में उलझे रहे अधिकारी

Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
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मैनपुरी। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन सरकारी कार्यालयों में देर रात तक अफरा-तफरी का आलम रहा। दो-तीन दिनों में मिले बजट को खर्च करने की कवायद और विल वाउचर बनवाकर ट्रेजरी में देने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। कई विभाग एक दिन पूर्व मिले बजट का खर्च नहीं कर सके तो मिला बजट सरेंडर करना पड़ा। वहीं कई विभागों को अपेक्षित बजट ही नहीं मिल सका। जिससे उनके वित्तीय वर्ष के लक्ष्य ही पूरे नहीं हो सके।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय को 30 मार्च को 1.45 लाख रुपये का बजट पशुआें के लिए वैक्सीन खरीदने को मिला। विभाग यह पैसा खर्च ही नहीं कर सका और उसे मिले बजट को सरेंडर करना पड़ा। इससे वैक्सीन लगाने का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सका। कामधेनु डेयरी योजना के लिए मिले 3.10 लाख रुपये भी खर्च न कर पाने की दशा में सरेंडर करने पड़ गए। जिला कृषि अधिकारी कार्यालय को भी 4.71 लाख रुपये सरेंडर करने पड़े। स्वच्छ भारत अभियान के तहत जिले में लक्ष्य के अनुरूप 5.50 करोड़ रुपये की दरकार थी लेकिन 30 मार्च को शौचालयों के निर्माण के लिए 4.50 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया। पूरे दिन विभागीय अधिकारी और कर्मचारी आवंटित बजट को लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर करने में जुटे रहे। डेढ़ करोड़ रुपये कम मिलने से शौचालयों का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। समाज कल्याण विभाग को भी करीब 27 हजार रुपये सरेंडर करने पड़े। बताया गया कि 30 और 31 मार्च को करीब 20 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया जिसमें से करीब चार करोड़ रुपये खर्च न कर पाने की दशा में सरेंडर करना पड़ा। मंगलवार को सुबह नौ बजे से ही सरकारी कार्यालय गुलजार हो गए थे और देर रात तक अधिकारी-कर्मचारी आंकड़ों के खेल में उलझे रहे। लोक निर्माण विभाग में सुबह से देर रात तक कार्यों को कागज में उतारने का काम जारी रहा। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई कार्य तो फाइलों में ही करा लिए जा रहे हैं। कागजों में काम हो गया बाद में कार्य भी करा लिए जाएंगे। विद्युत विभाग में वर्ष में विद्युतीकरण कराए गए ग्रामों की सूची, वसूली आदि की सूचनाएं बनाने में कर्मचरी देर रात तक जुटे रहे। ट्रेजरी में सुबह से लेकर देर रात तक बजट का पैसा आवंटित कराने और बिल बाउचर आदि जमा करने की होड़ सी लगी रही। देर शाम तक वरिष्ठ कोषाधिकारी बृजेश कुमार भी नहीं बता पा रहे थे कि कितना पैसा सरेंडर किया गया है।
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