मैनपुरी। हर सुबह जब बच्चे स्कूल जाने के लिए कच्चे रास्ते पर कदम रखते हैं, तो मां दरवाजे पर खड़ी आंखों में डर लिए देखती रहती हैं कि कहीं पांव न फिसल जाए, कहीं सिर न टकराए। बुजुर्ग तो इस रास्ते को देखकर ही घर में कैद हो जाते हैं। एंबुलेंस का पहिया इस मिट्टी में फंसता है तो मरीज की उम्मीदें घुट-घुट कर रह जाती हैं।
यह कहानी है ब्लॉक जागीर के गांव फरीदपुर की। यहां एक किलोमीटर की सड़क ने 1600 जिंदगियों की सांसें रोक रखी हैं। रविवार की सुबह जब सूरज की किरणों ने कीचड़ को और चमकाया तो ग्रामीणों का दर्द बांध तोड़कर बाहर आ गया। ग्रामीणों ने नारे लगाए, सड़क नहीं तो वोट नहीं, दलदल मिला तो तुम्हें क्या मिलेगा? भाजपा के खिलाफ भी गुस्सा फूटा, क्योंकि हर चुनाव से पहले आने वाले नेताओं ने कभी पक्की सड़क का सपना दिखाया तो कभी पंचायत घर का झूठा वादा दिया।
सड़क बनाने का दिया था भरोसा
पिछली बार जब हमने वोट बहिष्कार की धमकी दी, तो अफसरों ने हाथ जोड़कर कहा कि आपकी सड़क बनेगी। सालों बीत गए, राहें वहीं रहीं, बस हमारे पांवों के छाले बढ़ गए। यह कहना था अश्वनी कुमार का, जिनके साथ जेसीराम, लाखन सिंह, श्याम मोहन, राहुल, विकास, जगमोहन, हरिओम, हीरालाल, शिवम, रामवीर, पन्नालाल, निरपत, राजेश, अखिलेश, प्रेमसिंह थे। सैकड़ों चेहरे, एक ही दर्द।
एक किलोमीटर में बंधी जिंदगी
गर्भवती महिलाएं अस्पताल जाने से डरती हैं। बुजुर्गों को नदी पार करने की तरह इस रास्ते से गुज़रना पड़ता है। बच्चों के घुटनों पर हर दिन नए निशान बनते हैं। एक ग्रामीण ने कहा कि हमारी जिंदगी एक किलोमीटर में बंधी है। सरकारी आश्वासन की हवा में हम उड़ तो सकते हैं पर उतरना इसी कीचड़ में है।
पंचायत घर का भी हो निर्माण
ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि अब आश्वासनों से मन नहीं भरेगा। उन्होंने गांव की एक किलोमीटर मुख्य सड़क का पक्कीकरण, चिन्हित भूमि पर पंचायत घर का निर्माण कराया जाए। वरना आगामी विधानसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। वोट देंगे लेकिन उस गाड़ी को, जो पहले हमारी गांव की सड़क तक आए। जब सरकारी वाहन ही गांव नहीं आ सकते, तो हमारा वोट कैसे जाए उन तक, जो हमारे दर्द को नहीं सुनते।
सड़क की समस्या के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ भी नहीं मिला। सुनील कुमार, ग्रामीण
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आम दिनों की परेशानी के साथ बारिश में आवागमन में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। रास्ते से पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। गांव वालों की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। वेदराम राजपूत, पूर्व प्रधान
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सालों बीत चुके हैं पर रास्ता अभी तक नहीं बना सरकार विकास की बात करती है यहां विकास तो छोड़िए लोगों को आवागमन की आम सुविधा भी नहीं मिल पा रही। राम खिलाड़ी ग्रामीण
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बोले प्रधान
कई बार प्रयास किया गया है। राजनीतिक लोगों से मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मार्ग से निकलने में सभी वर्ग को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक किलोमीटर लंबी सड़क होने की वजह से मैं इसका निर्माण नहीं कर सकता हूं इसके लिए जनप्रतिनिधि के बजट से ही समस्या दूर हो सकती है।
नेत्रपाल सिंह, प्रधान
वर्जन
मार्ग की समस्या के संबंध में शिकायत मिली है। प्रस्ताव भेज दिया है। बजट पास होते ही मार्ग बनाने का काम शुरू हो जाएगा।
भूकेश, अधिशाषी अभियंता, निर्माण खंड
फोटो 29 फरीदपुर का कच्चा मार्ग और गड्ढे में भरा पानी। संवाद
फोटो 29 फरीदपुर का कच्चा मार्ग और गड्ढे में भरा पानी। संवाद
फोटो 29 फरीदपुर का कच्चा मार्ग और गड्ढे में भरा पानी। संवाद
फोटो 29 फरीदपुर का कच्चा मार्ग और गड्ढे में भरा पानी। संवाद