सीएमओ आफिस में छुट्टी के दिन चल रही टेंडर प्रक्रिया के दौरान हथियारबंद लोगों को देखकर कर्मियों के पसीने छूट गए। उन्होंने 100 नंबर डायल कर पुलिस को सूचना भी दी लेकिन कोई भी पुलिसकर्मी यहां नहीं पहुंचा। हालांकि सीएमओ केके शर्मा ने प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ी की बात से इंकार किया।
सीएमओ कार्यालय में करीब 18 से अधिक संविदाकर्मी सेवा प्रदाता कंपनी के जरिए विभाग में नौकरी कर रहे हैं। 31 मार्च को कंपनी का अनुबंध समाप्त होने के बाद उसके नवीनीकरण प्रक्रिया के लिए सीएमओ कार्यालय में सेवा प्रदाता कंपनी के चयन के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए। सोमवार को छुट्टी के दिन भी इस प्रक्रिया को कार्यालय में गुपचुप ढंग से अंजाम दिया जा रहा था। इसी बीच आगरा सेवा प्रदाता कंपनी ब्रेन पावर के लोग स्कार्पियो लेकर परिसर में दाखिल हुए। गाड़ी से उतरे लोगों के पास हथियार थे जिन्हें देखकर कर्मी सहम गए। कर्मियों ने प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए 100 नंबर डायल कर पुलिस को सूचना दी लेकिन कोई भी पुलिसकर्मी यहां नहीं पहुंचा। संविदाकर्मी पंकज शर्मा ने बताया कि स्कार्पियो में सवार लोग जिस तरह से परिसर में दाखिल हुए उससे कर्मी भयभीत हो गए।
उन्होंने कहा कि हर साल बीपीएम और एमसीटीएस कर्मियों के नवीनीकरण के टेंडर आमंत्रित किए जाते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत यहां प्रक्रिया गुपचुप ढंग से की जा रही था। आगरा की सेवा प्रदाता कंपनी के रविंद्र सिंह अपने साथियों के साथ पहुंचे जिन्हें देखकर कर्मी डर गए। उन्होंने कहा कि सभी कर्मी चाहते हैं कि वो राज्य स्वास्थ्य समिति के अन्तर्गत अनुबंधित किए जाएं ताकि उनको मिलने वाले मानदेय में सेवा प्रदाता द्वारा की जा रही कटौती को रोका जा सके। इस तरह से भय का माहौल बनाने वाले लोगों के साथ काम करने में दिक्कत होगी। वहीं मामले को तूल पकड़ता देख सीएमओ आफिस के बाहर टेंडर प्रक्रिया संपन्न कराई गई।
टेंडर प्रक्रिया निष्पक्षता के साथ कराई गई है किसी भी गड़बड़ी का मामला सामने नहीं आया है। जो लोग हथियार लेकर परिसर में दाखिल हुए थे वो तरीका गलत है। कर्मियों को भयभीत होना भी सही है। पूरे प्रकरण की जाचं की जाएगी किसी भी तरह की गड़बड़ी की स्थिति में टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी जाएगी।
- केके शर्मा, सीएमओ