जिले में अनफिट वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनसे निकलने वाला जहरीला धुआं दम घोंट रहा है। जागरूकता की कमी के चलतेलोग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। पंजीकृत और बाहर से खरीदे गए करीब 8-10 हजार वाहन ऐसे हैं जो दस साल से पुराने हैं। इनमें निजी और व्यावसायिक दोनों वाहन शामिल हैं। यही वाहन शहर की हवा में जहर घोल रहे हैं। पिछले तीन दिन में प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा बढ़ा महसूस किया।
खेतों में जलने वाली पुआल के मुकाबले बाइक और चौपहिया वाहनों से निकलने वाला धुआं कहीं अधिक जहरीला और नुकसानदायक होता है। इसके बाद भी बड़ी संख्या में शहर में अनफिट वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। नियमानुसार प्रत्येक तीन माह में एक बार सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त केंद्र पर वाहनों के प्रदूषण उत्सर्जन की जांच होनी चाहिए। यदि कोई वाहन अधिक प्रदूषण करता मिलता है तो वह सड़क पर चलने के लिए अनफिट होता है।
शहर में कहीं भी प्रदूषण उत्सर्जन जांच केंद्र नहीं है। इसके चलते वाहन चालक खरीदने के बाद कभी भी इसकी चेकिंग ही नहीं कराते। दस साल से पुराने वाहनों के संचालन पर भी रोक है। लेकिन यह नियम भी कहीं लागू होता नहीं दिखता है। एक अनुमान के अनुसार जिले में पंजीकृत और बाहर से खरीदे गए करीब 8-10 हजार वाहन ऐसे हैं जो दस साल से पुराने हैं। इनमें निजी और व्यावसायिक दोनों वाहन शामिल हैं।
आटोमोबाइल सर्विस की दुकान चलाने वाले शेखर ने बताया कि यदि वाहनों की समय-समय पर सर्विस कराई जाए तो काफी हद तक इनसे फैलने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सकता है। सही समय पर सर्विस न कराने के ही चलते वाहन प्रदूषण अधिक फैलाते हैं। वहीं सुखेंद्र सिंह का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। जो वाहन अधिक प्रदूषण फैलाते दिखें उन्हें तत्काल सीज कर देना चाहिए। साथ ही ऐसे वाहन मालिकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
शहर में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। ताकि शहर में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाया जाएगा।
- सुनील कुमार सक्सेना, एसपी