उन्नत प्रजातियों का बीज उत्पादन करें: डा. शंकर
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कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में एक दिवसीय दलहन, तिलहन की नवीनतम उत्पादन तकनीकी पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। डा. शंकर सिंह ने कहा किसानों को विभिन्न दलहनी फसलों की उन्नत प्रजातियों के बीज उपलब्ध न हो पाते हैं क्योंकि इनका बीज उत्पादन नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा दलहन उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए उन्नत प्रजातियों का बीजोत्पादन पर्याप्त मात्रा में करना होगा। तिलहनी फसलों में राई का प्रमुख स्थान है। देश में इस फसल के लिए 62.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में आच्छादित है। राई-सरसों की उन्नत प्रजातियां सिंचित दशा में बसंती, वरुणा, क्रांति, वरदान, पूसागोल्ड, नरेंद्र-राई, उर्वशी प्रजातियां 125 से 130 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं और उत्पादकता 22-25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। असिंचित दशा में वैभव, वरुणा लगभग 125-130 दिन और उत्पादकता 15-20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर विलंब दशा में, आशीर्वाद 130-135 दिन उत्पादकता 20-22 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। सिंचित एवं असिंचित क्षेत्रों में पांच-छह किलोग्राम हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए। इस मौके पर विकास रंजन चैाधरी, जगदीश मिश्रा के अलावा 40 सेवारत कर्मियों ने भाग लिया।