जिले में शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। जगह-जगह बोतल, पाउच में बिक्री हो रही है तो प्लांट खुले हैं लेकिन मानक कोई पूरे नहीं कर रहा है। मिनरल वाटर के नाम पर पानी की बोतल और पाउच बेच रहे दो वाटर प्लांट के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। पानी का प्लांट खोलकर उससे पानी की बिक्री के लिए वीआईएस (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड) प्रमाण पत्र लेना होता है। इसके लिए संबंधित विभाग पूरी जांच करने के बाद पानी शुद्ध पाए जाने पर ही प्रमाण पत्र जारी करता है। लेकिन जिले में सिर्फ एक के पास ही वीआईएस है।
गर्मी में पानी की बिक्री बढ़ गई है। पानी की किल्लत और अशुद्ध पानी की समस्या से निजात पाने के लिए लोग बाजार में बिक रहे पानी को खरीद रहे हैं। पानी की बढ़ती मांग को देखकर पानी के प्लांट की संख्या भी बढ़ी है। जिले में एक दर्जन पानी के प्लांट संचालित हैं। ग्राहकों को मिनरल वाटर देने का दावा करने वाले इन प्लांटों पर से आने वाले पानी में मिनरल की कोई गारंटी नहीं है। टीडीएस भी कई गुना अधिक है। कई प्लांट पर तो सबमर्सिबल का सीधा पानी चिलर में डालकर जार और बोतलों में भरकर बेचा जा रहा है। लोग पानी को मिनरल वाटर मानकर खरीद रहे हैं। बिना प्रमाण पत्र वाले नगरपालिका के पीछे और किला बजरिया के पीछे चल रहे वाटर प्लांट के संचालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने किसी प्लांट संचालक पर कार्रवाई नहीं की।
कई पाउच पर नहीं पेकिंग और एक्सपायरी डेट
नियमानुसार पैक्ड पानी की बोतल और पाउच पर पानी की पैकिंग और एक्सपायरी डेट लिखी होनी चाहिए लेकिन कई पाउच पर ऐसा नहीं किया जा रहा है। जिससे कई माह पुराने पाउच की बिक्री भी की जा रही है।
इतनी मात्रा में होने चाहिए तत्व
तत्व का नाम कितनी मात्रा तक नार्मल
आयरन 0.5- एक मिग्रा तक
फ्लोराइड 0.4-एक मिग्रा तक
टीडीएस (टोटल डिजॉल्व सॉलिड) 500-1000 मिग्रा तक
जिले में सिर्फ एक प्लांट के पास सेंट्रल से प्रमाण-पत्र है। मिनरल भी पानी में नहीं मिलाए जा रहे हैं। शीघ्र ही बड़े पैमाने पर वाटर प्लांट पर छापामार कार्रवाई की जाएगी। यहां पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भी भेजा जाएगा। सैंपल में पानी शुद्ध न पाए जाने और पैकिंग डेट नहीं होने पर प्लांट संचालक के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।
- चित्ररंजन कुमार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी