मैनपुरी। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना कागजों में दौड़ रही हैं। वास्तविकता में योजना की हकीकत क्या है यह जानने के लिए अमर उजाला की टीम ने गुरुवार को ब्लाक मैनपुरी के लोहिया ग्राम करीमगंज का हाल जाना। लोहिया गांव घोषित होने के तीन वर्ष में भी गांव के हालात बदहाल हैं। गांव की मुख्य गली में जहां जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है वहीं बिना तारों के ही फाइलों में लगे खंभों में करंट दौड़ रहा है।
विकास खंड क्षेत्र के ग्राम करीमगंज को वर्ष 2012-13 में लोहिया ग्राम चिह्नित किया गया। लोगों को उम्मीद थी कि अब गांव का चहुमुखी विकास होगा लेकिन अधिकांश पात्रों को योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल सका। गांव की प्रमुख गली में लगभग 15 वर्ष पुराना खड़ंजा बना हुआ है। जलनिकासी की व्यवस्था न होने से जलभराव के हालात बने हुए हैं। बारिश में तो वहां से निकलना भी मुश्किल होता है।
गांव की धनकांता के पति की मौत लगभग दो वर्ष पूर्व हो गई। उनके पास अधिक खेती भी नहीं है। उसने पारिवारिक मदद योजना के लिए फार्म भरा लेकिन न तो सहायता राशि मिली और न विधवा पेंशन बन सकी। गांव के कमलेश शर्मा का कहना था कि वह कच्चे घर में पड़ी झोपड़ी में रहता है। कई बार आवास के लिए प्रार्थना पत्र दिए लेकिन सुनवाई नहीं हुई। गांव में कई अपात्रों को लोहिया आवास और इंदिरा आवास दिए गए हैं। जबकि कई पात्र आज भी परेशान हैं। गांव के बाहर परिषदीय स्कूल के समीप मकान बनाने वाले उत्तम पांडेय का कहना है कि कच्ची बदहाल गली से बारिश के मौसम में घरों से निकलना मुश्किल होता है। बच्चे तो बारिश में घरों से ही नहीं निकलते।
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नहीं आते चिकित्सक और कर्मचारी
गांव में राजकीय पशु अस्पताल और राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल के सरकारी भवन हैं। इनमें चिकित्सक नहीं पहुंचते। बुधवार को पशु चिकित्सालय में जहां चतुर्थ श्रेणी कर्मी पुष्पा मौजूद थीं वहीं होम्योपैथिक अस्पताल में ताला पड़ा था। ग्रामीणों का कहना था कि चिकित्सक और कर्मचारी आते ही नहीं हैं। वहीं 2007 में बना पशु अस्पताल का भवन देखरेख के अभाव में बदहाल है।
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खंभे लगे पर तार नहीं खिंचे
मैनपुरी-कुरावली मुख्य मार्ग से गांव में बिजली की लाइन बनाई गई है। इसके लिए खंभे लगे हैं लेकिन इन पर तार नहीं खींचे गए। बिजली विभाग ने गांव को पूरी तरह से संतृप्त दिखाया है। ग्रामीण 200-300 मीटर केबल खींचकर ला रहे हैं।