मैनपुरी। बिना पहचान पत्र की जांच के अब मोबाइल सिम बेचना मंहगा पड़ सकता है। फर्जी पहचान पत्र से सिमों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रदेश के डीजीपी ने संचार कंपनियों को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं। डीजीपी के पत्र का संज्ञान लेते हुए बीएसएनएल के मुख्य महाप्रबंधक ने भी विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
आपराधिक वारदातों में फर्जी आईडी से ली गई सिमों के प्रयोग को देखते हुए डीजीपी ने निर्देश जारी किए हैं। डीजीपी देवराज नागर ने पत्र में कहा कि बिना पहचान पत्र के सत्यापन के बेची गई सिमों का चालू नहीं किया जाए। आईडी से धारक की पूरी जानकारी जुटाई जाए। इसके लिए सिम विक्रेताओं की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए। लापरवाही करने वाले वितरकों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की भी बात कही गई है। डीजीपी के पत्र का संज्ञान लेते हुए बीएसएनएल के मुख्य महा प्रबंधक ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि बीएसएनएल की सिमों की बिक्री करने वाले फ्रेंचाइजी और वितरकों को हिदायत दी जाए कि बिना पहचान पत्र के सत्यापन के सिमों की बिक्री नहीं की जाए। पहचान पत्र भी स्पष्ट एवं धारक की हस्ताक्षरित की हो। इसके बाद भी फर्जी पहचान पत्र साबित होने पर वितरक की जवाबदेही होगी।
फ्रेंचाइजी एवं वितरक दोनों की जिम्मेदारी
बीएसएनएल के टीडीएम (जिला प्रबंधक दूरसंचार) एमएमएल भास्कर का कहना है कि फर्जी आईडी से सिमों की बिक्री रोकने के लिए सभी वितरकों को निर्देश दिए गए हैं। आईडी की स्पष्टता भी अनिवार्य की गई है। आईडी के फर्जी साबित होने पर वितरक के साथ ही फ्रेंचाइजी की भी बराबर की जिम्मेदारी होगी।
फर्जी आईडी की सिम से दी थी जज को धमकी
बेवर निवासी एक युवक ने एक साल पहले मोबाइल से फोन कर एक जज को धमकी दी थी। जज की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने युवक को जेल भेजा था। जांच में खुलासा हुआ था कि युवक ने फर्जी आईडी से सिम खरीदी थी। युवक को कई दिनों तक जेल में रहना पड़ा था। यह मुकदमा अब तक विचाराधीन है।