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कोर्ट के आदेश पर दर्ज रिपोर्ट पर शासन गंभीर

Sat, 07 Sep 2013 05:35 AM IST
Mainpuri
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मैनपुरी। अब कोर्ट के आदेश पर दर्ज की गई रिपोर्ट में पुलिस को पारदर्शिता से विवेचना करनी होगी। विवेचना के बाद फाइनल रिपोर्ट अथवा चार्जशीट लगाने में स्पष्ट विवरण भी अंकित करना होगा। इस प्रकार के मामलों का थाने में अलग से रजिस्टर मेंटेन किया जाएगा। इस रजिस्टर की मासिक समीक्षा पुलिस अधिकारियों को करनी होगी।
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सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत कोर्ट में पीड़ित की शिकायत पर संज्ञान लेने के बाद रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश पुलिस को दिए जाते हैं। थाने में सुनवाई न होने पर पीड़ित कोर्ट में शिकायत दर्ज कराता है। शिकायत के समर्थन में खुद और दो गवाहों के बयान दर्ज कराने के साथ ही शपथ पत्र भी देता है। लेकिन कोर्ट के आदेश पर दर्ज मुकदमों में पुलिस द्वारा गंभीरता न बरते जाने की शिकायत पर शासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। इस संबंध में डीजीपी कार्यालय से पुलिस कार्यालय को निर्देश जारी किए गए हैं। अपर पुलिस महानिदेशक अभियोजन ने जारी निर्देश में कहा है कि कोर्ट के आदेश पर दर्ज किए मामलों का अलग से थाने पर रजिस्टर बनाया जाए। रजिस्टर में अपराध का विवरण दर्ज करने के बाद पुलिस द्वारा विवेचना की जाए। विवेचना के दौरान प्रकाश में आए तथ्यों का स्पष्ट विवरण दिया जाए। मामले में लगाई गई चार्जशीट अथवा फाइनल रिपोर्ट में उसका कारण भी स्पष्ट रूप से दर्ज करनी होगी। थाने में इस तरह के मामलों के बनाए गए रजिस्टर की मासिक समीक्षा पुलिस अधिकारी को करनी होगी।

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थाने में सुनवाई न होने पर पीड़ित जाते कोर्ट
फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र कुमार भारद्वाज कहते हैं कि थाने में न्याय न मिलने पर पीड़ित कोर्ट की शरण लेता है। यदि थाने में ही रिपोर्ट दर्ज कर ली जाए तो पीड़ित को कोर्ट नहीं आना होगा। कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस रिपोर्ट लिखने में दो-चार दिन लगा लेती है।
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निरपराध को बचाने को होती विवेचना
एएसपी आरपी सिंह का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर दर्ज की गई रिपोर्ट की विवेचना गंभीरता से कराई जाती है। शासन और कोर्ट दोनों की मंशा है कि किसी निरपराध को सजा नहीं होनी चाहिए। इसी के चलते विवेचना के दौरान मामला हल्का पाए जाने पर धाराएं बदली जाती हैं। वहीं झूठा पाए जाने पर फाइनल रिपोर्ट लगाई जाती है। मामला सच साबित होने पर चार्जशीट भी दाखिल की जाती है।
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वर्ष मामले फाइनल रिपोर्ट चार्जशीट लंबित
2013 अगस्त तक 87 09 68 10
2012 108 30 78 00
2011 121 31 90 00
2010 118 29 89 00
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