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साथी के हत्यारों को भी नहीं पकड़ पाई पुलिस

Tue, 05 Mar 2013 05:30 AM IST
Mainpuri
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मैनपुरी। प्रतापगढ़ में सीओ की हत्या के बाद पुलिस के इकबाल पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालात यह है कि पुलिस पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और पुलिस आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाती। सिपाही अजय यादव की हत्या कर पुलिस कस्टडी से फरार हुए आरोपियों को पुलिस अभी तक नहीं खोज पाई है। पथराव और मारपीट के मामलों में भी पुलिस ही आखिरकार दबाव में आती रही है। जब तब लोग छोटी छोटी बातों को लेकर जाम लगा देते है, पुलिस पर पथराव लोग कर देते है, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है। पुलिस रिपोर्ट भी दर्ज करती है। अधिकांश मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता। कभी राजनीतिक दबाव तो कभी कानून व्यवस्था बिगड़ने का खौफ दिखाकर पुलिस के कदम पीछे खींच लिए जाते हैं। मैनपुरी में भी कई घटनाएं पुलिस पर हमलों की हुई है, अब असामाजिक तत्वों को न पुलिस का खौफ है और न कानून का डर।
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खाकी खुद सुरक्षित नहीं
31 जनवरी 2013 को सिपाही अजय यादव की हत्या कर पेशी पर आए ऋषि कुमार और चंद्र कुमार फरार हो गए। दोनों आरोपी एक डबल मर्ड की घटना में जेल में बंद थे। घटना को एक माह से अधिक बीत चुका है लेकिन अभी तक दोनों पुलिस के हाथ नहीं आए। अब इन पर इनाम घोषित कर दिया गया है।
नवंबर 2012 में कोतवाली के कांस्टेबल श्रीराम और गोविंद पर नवीन मंडी के निकट गिहार कालोनी के शातिर युवकों ने हमला किया।बाद में आरोपियों ने न्यायालय में सरेंडर कर दिया था।
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मार्च 2012 में थानाध्यक्ष बरनाहल आरएस सोलंकी और पुलिस टीम पर हमला बोला और पिटाई की। पुलिस ने तीन को जेल भेजा था, मुख्य आरोपी ने बाद में न्यायालय में सरेंडर कर दिया था।
जून 2011 में नगला रामसिंह औंछा निवासी कांस्टेबल सिकदार सिंह की गांव के बाहर गोली मारकर हत्या कर आरोपी फरार हुए थे। इस समय सारे आरोपी जेल में है।
वर्ष 2005 में बरनाहल में बाइक सवार बदमाशों का पीछा करते समय कांस्टेबल राजेश यादव की गोली मारकर हत्या की गई थी। एक आरोपी मुठभेड़ में मारा गया था। दो को फीरोजाबाद पुलिस ने जेल भेज दिया था।
पुलिस हिरासत से भागे अपराधी
थाना बेवर के जगतपुर निवासी सुरेंद्र उर्फ पिंटू नवंबर 2012 में चलती बस से हथकड़ी सहित फरार हुआ। पिंटू फतेहगढ़ कारागार में निरुद्ध था।
थाना बेवर के रतनपुर निवासी सुरजीत उर्फ लल्लन ने अक्तूबर 2011 में बेवर बस स्टैंड से भागने का प्रयास किया। उसे पुलिस ने राहगीरों की मदद से दबोचा था।
राजनीतिक हस्तक्षेप से गिरा मनोबल
गढ़िया घुटारा निवासी रिटायर्ड डीआईजी सतीश चंद्र यादव का कहना है कि पुलिस में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ने से पुलिस कर्मियों का मनोबल गिरता है। पुलिस कर्मियों की सही बात को भी अधिकारी दबाव के चलते गलत बता देते हैं। अधिकारियों को पुलिस का मनोबल बनाए रखने के लिए पुलिस पर हमला करने और पुलिस कर्मियों की हत्या के मामले में आरोपियों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।
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पुलिस बल पर हमलावर करने वालों के खिलाफ पुलिस को निरोधात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। आरोपियों के खिलाफ गुंडा, गैंगेस्टर और रासुका जैसी कार्रवाई भी की जाएगी। अपराधिक वारदातों को अंजाम देने वालों के पास यदि लाइसेंसी शस्त्र हैं तो उनका निरस्तीकरण किया जाएगा।
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- श्रीकांत सिंह, एसपी
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