नोटबंदी से गहराई कैश की किल्लत फिलहाल जिले में दूर होती नहीं दिख रही है। महीने में कम से कम 600-700 करोड़ रुपये की जरूरत है। पर, जनपद में सिर्फ 280 करोड़ रुपये की आपूर्ति आरबीआई से हुई है।
देखें तो जिले में प्रतिदिन 25 करोड़ रुपये की जरूरत होती है। इनमें से 20 करोड़ रुपये का भुगतान काउंटर से होता था। शेष पांच करोड़ रुपये प्रतिदिन जिले के एटीएम में डाले जाते थे। पर, नोटबंदी के बाद से प्रतिदिन जिले में मात्र सात करोड़ रुपये तक की आपूर्ति हो रही है। यही कारण है कि बैंकों के काउंटर से लेकर एटीएम तक पर लोगों की लाइनें लगी हुई हैं। यही नहीं जिले के अधिकांश एटीएम भी बंद पड़े हैं। एलडीएम देवेंद्र कुमार अग्रवाल का कहना है कि नोटबंदी के बाद से अब तक जिले में मात्र 280 करोड़ रुपये की करेंसी आई है। जबकि इस समयावधि के दौरान 600-700 करोड़ रुपये की करेंसी की आवश्यकता थी। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन आरबीआई को 20-25 करोड़ रुपये की करेंसी की मांग भेजी जाती है, लेकिन उसके अनुरूप नोटों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जो करेंसी आ रही है उसी में व्यवस्था बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
शनिवार को भी लगी रहीं लाइनें
मैनपुरी। शहर से लेकर देहात बैंकों और एटीएम पर लोगों की लाइनें लगी रहीं। यह और बात है कि जिले और शहर के गिनेचुने एटीएम पर ही पैसा था। शेष खाली या खराब पड़े हुए थे। संभावना जताई जा रही है कि अगले दो तीन दिन में नई करेंसी आने पर हालात में काफी सुधार होगा।