पिछले एक महीने से जिला प्रशासन और चुनाव आयोग मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए दिन रात एक किए है। यह मशक्कत यूं ही नहीं की जा रही है। पिछले 16 विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो पता चलता है कि जिले की दो विधानसभा सीटों पर 40 फीसदी से भी कम मतदान हुआ। यही कारण है कि मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग से लेकर जिला प्रशासन तक दिनरात एक किए हुए है।
स्वतंत्र भारत का पहला विधानसभा चुनाव 1951 में हुआ। देख जाए तो पहला चुनाव होने के कारण लोगों में मतदान के प्रति उत्साह अधिक होना चाहिए लेकिन मैनपुरी विधानसभा के आंकड़े कुछ और ही कहते हैं। यहां पर उक्त चुनाव में मात्र 37.37 फीसदी ही मतदान हुआ था। उक्त चुनाव में मैनपुरी विधानसभा में कुल 80696 मतदाता थे। इनमें से मात्र 30154 लोगों ने ही मतदान किया। यह मतदान जिले की सभी सीटों पर हुए अब तक सभी विधानसभा चुनावों में सबसे कम है। जो कि अपने आप में एक रिकार्ड है। इस चुनाव में कांग्रेस के वीरेंद्र पति को 14263 मत मिले थे। जबकि उनके विरोधी हेमचंद्र को मात्र 5141 मत ही प्राप्त हुए। इस प्रकार वीरेंद्रपति 9122 वोटों से जीते थे।
इसी प्रकार किशनी में ही 1985 में ही मात्र 37.44 फीसदी मतदान हुआ। तब कुल 151203 मतदाताओं में से 56605 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इस चुनाव में 19405 मत पाकर कांग्रेस राम सिंह ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी रामेश्वर दयाल को 1307 मतों से हराया था। रामेश्वर दयाल को 18018 मत मिले थे।
इसके बाद सबसे कम मतदान का रिकार्ड आपातकाल के बाद 1980 में हुए विधानसभा चुनावों में बना। तब मात्र 39 फीसदी मतदाताओं ने ही मुंशीलाल को विधानसभा पहुंचा दिया था। 1980 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान किशनी विधानसभा में कुल 137730 मतदाता थे। तब मात्र 53711 मतदाताओं ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इनमें से 804 वोट निरस्त हो गए थे और 52907 मत ही वैध पाए गए थे। इन चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी मुंशीलाल को 24022 मत प्राप्त हुए थे। वहीं उनके विरोधी जनतादल प्रत्याशी रामदीन को सिर्फ 9251 वोट ही मिले थे। इस प्रकार मुंशीलाल ने 14771 से तब जीत दर्ज की थी।
जिले में पांच सबसे कम मतदान के रिकार्ड
वर्ष विधानसभा मत प्रतिशत
1951 मैनपुरी 37.37
1985 किशनी 37.44
1980 किशनी 39
1977 शिकोहाबाद 40.46
1977 भोगांव 40.92