मैनपुरी। कुरावली क्षेत्र के एक गांव में नौ साल पहले हुई घटना में न्यायालय ने फैसला सुनाया है। दुष्कर्म और छेड़छाड़ के बाद युवती को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले दोषी को सजा मिली है। पाॅक्सो एक्ट प्रथम के न्यायाधीश तालेवर सिंह ने दोषी पर 10 साल की सजा और 33 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। दोषी मनोज कुमार को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
18 फरवरी 2017 की शाम को कुरावली क्षेत्र के एक गांव की युवती खेत की ओर जा रही थी। तभी नगला चिरौंजी निवासी मनोज कुमार ने उससे छेड़छाड़ की। युवती के पिता शोर सुनकर उसे बचाने दौड़े। आरोपित मनोज कुमार जान से मारने की धमकी देकर वहां से भाग गया। इस घटना से आहत होकर युवती ने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। 19 फरवरी 2017 की सुबह उसका शव कमरे में लटका मिला था। युवती के शव के पास एक सुसाइड नोट भी मिला था। सुसाइड नोट में युवती ने लिखा था कि आरोपित मनोज कुमार पहले भी कई बार उसे धमकाकर दुष्कर्म कर चुका था। वह लगातार शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाल रहा था। इसी उत्पीड़न के कारण युवती ने आत्महत्या का कदम उठाया था। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। पाॅक्सो एक्ट के प्रथम न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई। सहायक शासकीय अधिवक्ता ने वादी, विवेचक, डॉक्टर और अन्य गवाहों की गवाही कराई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा सुसाइड नोट जैसे साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। न्यायाधीश तालेवर सिंह ने मनोज कुमार को दुष्कर्म के बाद आत्महत्या के लिए विवश करने का दोषी पाया और उसे 10 साल की सजा सुनाई। इसके अलावा उस पर 33 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
हत्या के मामले में दो दोषियों को आजीवन कारावास
मैनपुरी। कस्बा करहल में छह साल पहले एक युवक की चाकू मारकर हत्या हुई थी। इस मामले में न्यायालय ने दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एफटीसी प्रथम के न्यायाधीश ने दोषियों पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
करहल के मुहल्ला तपा की नगरिया निवासी 20 वर्षीय देवेंद्र सिंह छोटू-भटूरे का ठेल लगाकर परिवार का भरण पोषण करता था। जुलाई 2020 में सनी यादव और मोहित कुमार उर्फ मोहयत शाक्य उसके ठेल पर पहुंचे। रुपये मांगने पर उन्होंने देवेंद्र को गाली दी और धमकी देकर चले गए। 25 अगस्त 2020 को देवेंद्र अपने भाई दीपांशु के साथ गढ़िया चौराहे पर जा रहा था। रंजिश के चलते मोहित शाक्य और सनी यादव ने उसे रास्ते में घेर लिया। आरोपितों ने जान से मारने की धमकी देते हुए चाकू से वार कर दिया। देवेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई ले जाया गया। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। मृतक के पिता अमर सिंह ने करहल थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय भेज दिया।
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक प्रथम के न्यायालय में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता ने पैरवी की। उन्होंने वादी, विवेचक और डॉक्टर सहित अन्य गवाहों की गवाही दिलाई। एफटीसी प्रथम के न्यायाधीश कुलदीप सिंह तृतीय ने सनी यादव और मोहित कुमार उर्फ मोहित शाक्य को चाकू से वार कर युवक की हत्या करने का दोषी पाया। न्यायाधीश ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पुलिस ने हत्या मोहित की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त चाकू भी बरामद किया था, न्यायालय में इसे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। जिसमें मोहित पर चाकू रखने के दोष में दो साल की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
दहेज हत्या के मामले में सास-ससुर की जमानत याचिका खारिज
कासगंज। जिला जज रामेश्वर की अदालत ने दहेज हत्या के मामले में आरोपी सास-ससुर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। मैनपुरी निवासी जय सिंह ने अमांपुर थाना में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपनी बेटी पिंकी (22) की शादी 5 मई 2023 को अमांपुर के गांव नगला गुलरिया निवासी जसवंत सिंह से की थी।
शादी के बाद से ही ससुराल में पति जसवंत, ससुर जबर सिंह, सास रेशमा देवी, ननद लता और नंदोई सुनील कुमार अतिरिक्त दहेज में एक मोटरसाइकिल और 5 लाख रुपये की मांग के लिए पिंकी को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। प्रताड़ना के चलते उनकी बेटी ने महिला थाना मैनपुरी में पहले मामला भी दर्ज कराया था, जिसमें न्यायालय के माध्यम से 2 मई 2026 को समझौता हो गया थाा।
इसके बाद बेटी वापस अपने ससुराल चली गई थी। इसके कुछ दिन बाद ही 11 मई 2026 को ससुराल पक्ष ने बेटी की हत्या कर उसके शव को फंदे से लटका दिया। मामले में प्राथमिकी दर्ज करके पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
मामले में आरोपी सास-ससुर ने जमानत के लिए याचिका लगाई थी। इस पर सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता ने कहा कि मृतका के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे पुलिस ने तोड़ा था। मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है। जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया। इस पर न्यायाधीश ने ससुर जबर सिंह और सास रेशमा देवी की जमानत अर्जी निरस्त करने का आदेश सुनाया।