महोबा। बुंदेलखंड की पठारी धरती में मौसम में बढ़ रही गर्मी से बाजार में भी गरमाहट महसूस होने लगी है। यह बाजार है कूलरों की मरम्मत का। एक बार फिर से बाजार में कूलरों की मरम्मत का दौर शुरू हो गया है और जगह-जगह पर घास बिक्री करने वालों ने दुकान खोल ली है। फिलहाल मरम्मत कराने वालों व घास खरीदने वालों की संख्या में इजाफा होना शुरू हो गया है।
होली के बाद मौसम का पारा चढ़ने लगा था। जिसे देखते हुए शहर में कई जगहों पर कूलरों की घास की दुकान खुल गई थी और लोग भी घास खरीदने व अपने कूलरों की मरम्मत कराने का काम शुरू करा चुके थे। हर साल बुंदेलखंड में पड़ने वाली प्रचंड गर्मी को देखते हुए स्थानीय लोग इसके लिए तैयार हो रहे थे लेकिन छह दिन पहले अचानक दो दिन बारिश होने और मौसम ठंडा होने के कारण मरम्मत व घास बिक्री का कारोबार मंद पड़ गया। बारिश के बाद फिर से एक बार मौसम में गर्मी बढ़ने लगी है। जिसे देखते हुए दुकानदारों ने फिर से बाजार सजा ली है।
शहर के पुरानी गल्लामंडी में कूलर बिक्री का कारोबार करने वाले इरशाद ने बताया कि बारिश के कारण कूलरों की बिक्री, मरम्मत व घास बिक्री का काम थोड़ा कमजोर हो गया था। मगर, अब फिर से ग्राहक आने लगे हैं। रोजाना लोग, कूलरों के लिए पैडयुक्त घास व खुली घास खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाजार में खुली घास 100 रुपये किलोग्राम बिक रही है और पैडयुक्त घास 150 रुपये। जिसमें घास के बने तीन पैड होते हैं और यह लोहे की पतली तार से बंधे हुए रहते हैं। पैड को लेकर कूलर के तीनों ओर लगाना होता है बस। इसी तरह से घास को कूलर के तीनों ओर भरना पड़ता है, जिसमें समय लगता है। बताया कि लोग स्वयं ही घास कूलर में लगा लेते हैं। इसलिए अधिकांश तौर पर केवल घास बिक्री का काम ही हर जगह होता है। जैसे-जैसे मौसम गर्म होगा, बाजार में इसकी डिमांड बढ़ेगी।