फोटो 18 एमएएचपी 13 परिचय-ब्लॉक चरखारी की ग्राम पंचायत बरायं के सचिवालय में लटका ताला। संवाद
- फोटो : बंद आंगनबाड़ी केंद्र हड़हवा के बाहर प्रदर्शन करती महिलाएं।
महोबा/खरेला/अजनर। लोगों की सहूलियत के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में बनाए गए पंचायत भवनों में कहीं पर ताले लटके हैं तो कहीं पर लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में लोगों को पेंशन आवेदन, आय, जाति व अन्य प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जनसेवा केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है।
डिजिटल इंडिया के तहत सभी कार्य ऑनलाइन किए जाने के बाद शासन ने ग्रामीणों की सुविधा के लिए पंचायत स्तर पर मिनी सचिवालय बनाए हैं लेकिन सरकार की मंशा के अनुरूप यहां ग्रामीणों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
जिले की 273 ग्राम पंचायतों मेंं भवन के साथ-साथ पंचायत सहायक भी नियुक्त किए गए हैं। प्रत्येक पंचायत भवन में एक-एक कंप्यूटर, इंटरनेट सुविधा व अन्य जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए।
ताकि, पंचायत सहायक गांव के कार्यों की ऑनलाइन फीडिंग भुगतान, पेंशन फॉर्म, आय, जाति, निवास, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र आदि प्रमाण पत्रों का आवेदन कर उन्हें उपलब्ध करा सकें लेकिन अधिकांश सचिवालयोंं पर ताला लगा होने से ग्रामीणों को इनकी सुविधाओंं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
लापरवाही और उदासीनता के चलते इन सुविधाओं का लाभ लेने के लिए ग्रामीणों को जनसेवा केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ता है। इससे समय और रुपयों की बर्बादी हो रही है। मंगलवार को संवाद टीम ने सचिवालयोंं की पड़ताल की तो हकीकत सामने आई।
फोटो 18 एमएएचपी 13 परिचय-ब्लॉक चरखारी की ग्राम पंचायत बरायं के सचिवालय में लटका ताला। संवाद- फोटो : बंद आंगनबाड़ी केंद्र हड़हवा के बाहर प्रदर्शन करती महिलाएं।