महोबा/कबरई/खरेला। जिले में शुक्रवार की रात दो घंटे तक हुई बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। गेहूं, चना, मसूर और सरसों की फसल भींगने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। दिन में हल्की धूप निकलने पर खेतों में मड़ाई के लिए रखी फसल को किसान सुखाते नजर आए। किसानों का कहना है कि यदि एक-दो दिन मौसम और नहीं खुलता है तो फसल की लागत निकालना भी मुश्किल होगा।
रबी सीजन में इस बार जिले में करीब 2.32 लाख हेक्टेयर पर फसल बोई गई है। इसमें एक लाख दो हजार हेक्टेयर में गेहूं, 40 हजार हेक्टेयर में सरसों, 70 हजार हेक्टेयर में मटर व 20 हजार हेक्टेयर पर चना की फसल पककर तैयार है। शुक्रवार की रात हुई बारिश से खेतों में मड़ाई के लिए कटी फसल भीग गई। शनिवार को कुछ देर के लिए धूप निकलने पर किसान फसलों को सुखाते रहे। किसानों का कहना है कि अब उनके सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो जाएगा।
संवाद न्यूज एजेंसी की टीम गहरा गांव किसान वीरेंद्र सिंह के खेत पहुंची। तो उनकी मसूर की फसल बारिश की वजह से पूरी तरह भीगी मिली। किसान फसल को फैलाकर सुखाते हुए नजर आया। आसपास के खेतों में तेज हवा से गेहूं की फसल गिरी मिली। खरेला क्षेत्र में किसान वीर सिंह ने 12 बीघा भूमि पर चना की फसल बोई थी।
कटाई के बाद फसल खेत में पड़ी थी जबकि कुछ फसल कटाई के लिए रह गई। रात के समय हुई बारिश से फसल भीग गई। ऐसे में किसानों को फसल कटाई का काम बंद करना पड़ा। किसान का कहना है कि फसल गीली हो गई। यदि फसल नहीं सूखी तो बर्बाद हो जाएगी। बारिश ने उसकी मेहनत पर पानी फेर दिया।
कबरई संवाद के अनुसार रैवारा प्रधान रामचंद्र सिंह, बरबई प्रधान देवकीनंदन पांडेय, महेवा प्रधान जगदीश मौर्या, बीला दक्षिण प्रधान मेवालाल अनुरागी, गहरा निवासी कृष्णदत्त व्यास, विकास मिश्रा, अर्जुन सिंह, रामरतन श्रीवास, सिचौरा निवासी हाकिम सिंह आदि किसानों ने बताया कि गेहूं, चना, मटर, अलसी व सरसों की कटाई जोरों पर थी। कई खेतों में फसल कटी पड़ी है, कई जगह मड़ाई का काम चल रहा है। ऐसे में अचानक तेज हवा के साथ हुई बारिश से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई। जबकि अन्य फसलें भी भीगकर बर्बाद हो रही है।
फोटो 21 एमएएचपी 13 परिचय-खेत में बारिश से भीगी मसूर की फसल को सुखाने के लिए फैलाता गहरा गांव का
फोटो 21 एमएएचपी 13 परिचय-खेत में बारिश से भीगी मसूर की फसल को सुखाने के लिए फैलाता गहरा गांव का