आगरा की गौशाला में तीन दिन में सात गायों ने तोड़ा दम
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गर्मी में अन्ना जानवर पानी की तलाश में इधर-उधर भटकने को मजबूर है। प्रशासन द्वारा अभी तक शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में बनवाई गई चरही नहीं भरवाई गई। इससे अन्ना जानवर कीचड़युक्त पानी पीकर प्यास बुझा रहे है। आने वाले मई व जून माह में मवेशियाें के लिए पानी की भीषण समस्या पैदा होने की आशंका बनी है।
बुंदेलखंड की पठारी धरती में वैसे तो प्रत्येक वर्ष पानी की किल्लत होती है, लेकिन इस दफा प्रशासन द्वारा चरही न भरवाए जाने से अन्ना जानवर प्यास से इधर-उधर भटक रहे है। ग्रामीण क्षेत्रों में बनी तमाम चरही टूटी पड़ी तो अधिकांश में पानी ही नहीं है।
गौरतलब है कि दो वर्ष पहले भीषण सूखा पड़ने पर प्रशासन ने गांव-गांव में चरही का निर्माण कराया था। अधिकांश चरही हैंडपंपाें के समीप बनाई गई थी, जिससे हैंडपंप से बर्बाद होने वाला पानी चरही में भर सकें और अन्ना जानवरों को दिक्कत न हो। विकासखंड कबरई के पिपरामाफ गांव के मजरा संकटमोचन मठारी में अन्ना जानवर कीचड़युक्त पानी पीते नजर आए।