रोडवेज इमारत का निर्माण यात्रियों के लिए मुसीबत बन गया है। रोडवेज परिसर में जगह-जगह पड़े मलवे के कारण विभाग ने बसों का संचालन रोडवेज कार्यशाला से शुरू कर दिया है। रोडवेज कार्यशाला से बसों की आवागमन के लिए वर्षों से बंद गेट को तोड़कर चालू कर दिया गया।
छह दशक पहले रोडवेज की इमारत का शहर से बाहर निर्माण कराया गया था। उस समय रोडवेज के सामने खेत पड़े हुए थे। शाम से ही रोडवेज के आसपास सन्नाटा छा जाता था, लोग रात में रोडवेज तक आने जाने में डरते थे। रोडवेज के चारो तरफ एक हजार फिट तक कोई मकान और इमारत नहीं थी। उस समय रोडवेज को जंगल में माना जाता था, लेकिन धीरे-धीरे आबादी बढ़ी और रोडवेज के चारो तरफ पांच-पांच किमी. तक आबादी बढ़ गई और रोडवेज शहर के बीचों-बीच बस गया। ब्रिटिश हुकूमत में बनाई गई रोडवेज की इमारत जर्जर हो जाने के कारण अब उसका निर्माण किया जा रहा है। बसों के संचालन की कोई व्यवस्था न हो पाने के कारण कार्यशाला का दशकों से बंद पड़ा गेट तोड़कर बसों का संचालन शुरू कर दिया गया है। वहीं दूर-दराज से आने वाले यात्री अभी भी रोडवेज बस अड्डे में बसों का इंतजार करते रहते है।
छाया और बाथरूम न होने से यात्री परेशान
रोडवेज इमारत के निर्माण के चलते अब रोडवेज परिसर में न यात्रियों के छाया है और न ही बाथरूम का इंतजाम। तोड़फोड़ के दौरान कार्यदाई संस्था समाज कल्याण निर्माण निगम ने यात्रियों के छाया और बसों को छाया में खड़ा करने के लिए बनाए गए टीनशेड को हटा दिया है। वहीं यात्रियों के लिए बनाए गए शौचालय भी तोड़फोड़ कर मैदान बना दिया, इससे यात्रियों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।