भूकंप का खौफ अभी भी लोगाें में समाया हुआ है। लोग राताें को सुकून से सो नहीं पा रहे है। भू वैज्ञानिकाें ने उम्र गुजार चुके पुराने मकानाें को भूकंप से खतरा बताया है। वहीं कुलपहाड़ कस्बे में सौ साल पुरानी इमारत में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज चल रहा है। इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है, जो कभी भी ढह सकती है।
पुरानी इमारताें पर भूकंप का ज्यादा खतरा बना रहता है। बावजूद इसके राजकीय बालिका इंटर कॉलेज कुलपहाड़ जर्जर इमारत में चलने से बच्चाें को खतरा बढ़ गया है। हालांकि दो दिन की जिला प्रशासन ने विद्यालयाें की छुट्टी घोषित कर दी है। लेकिन छुट्टी खत्म होते ही इन्ही जर्जर इमारताें में बच्चाें को पुन: शिक्षा ग्रहण करनी पड़ेगी। भूकंप आने के बाद अब स्कूली छात्राएं भी बुरी तरह सहमी हुई हैं।
अभिभावकाें ने जर्जर इमारत में बच्चाें को भेजने से मना कर दिया है। हालांकि बालिका इंटर कॉलेज की दशा देखकर छात्राआेें को कमराें के अंदर बिठाने के बजाए खुले आसमान के नीचे लू और गर्मी के बीच बिठाया जा रहा है। हालांकि भूकंप की खबर के मद्देनजर अब टीचर भी सहमे हुए हैं। उन्हें भी अंग्रेजी हुकूमत की यह इमारत रास नहीं आ रही है।
भूकंप के दौरान क्या करें?
घबराएं नहीं धैर्य बनाए रखें।
ऊंची इमारत में हाें तो लिफ्ट का प्रयोग न करें।
कांच, खिड़कियाें, गिरने और टूटने वाले सामानाें से दूर रहें।
भूकंप का अहसास होने पर खुले मैदान पर सुरक्षित स्थान पर पहुंचें।
वाहन चला रहे हैं तो एक तरफ खड़े हो जाएं।
भूकंप के समय पुल से कभी न निकलें।
भूकंप के बाद बरती जाने वाली सावधानियां
पहले झटके के बाद और झटकाें के लिए तैयार रहें। क्याेंकि दूसरा और तीसरा झटका उतना प्रभावशाली नहीं होता।
टूटे हुए घर में दोबारा प्रवेश न करें और क्षतिग्रस्त इमारत से दूर रहें।
न अफवाह फैलाएं और न अफवाहाें पर विश्वास करें।