लक्ष्मीपत सिंहानियां हृदय रोग संस्थान कार्डियोलॉजी में शुक्रवार तड़के एक युवक ने तड़प कर दम तोड़ दिया। युवक ओपीडी में इलाज कराने आया था। उसे देर रात सीने में दर्द शुरू हुआ था। पर, यहां डॉक्टरों ने उसे बिना देखे सर्जरी वार्ड में जाने को कह दिया। सीना पकड़कर चीखते हुए युवक का दम निकल
गया। आधार कार्ड मिलने के बाद भी पुलिस ने युवक को अज्ञात बताकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। महोबा के खन्ना थाना अंतर्गत ग्योड़ी गांव निवासी संदीप सोनी (26) पुत्र सज्जन का इलाज कार्डियोलॉजी के सीवीटीएस विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश वर्मा कर रहे थे। गुरुवार को संदीप ने ओपीडी में प्रो. राकेश
वर्मा से परीक्षण कराया और अस्पताल परिसर में रुक गया। शुक्रवार सुबह उसे महोबा के लिए ट्रेन पकड़नी थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रात तकरीबन 2:30 बजे संदीप के सीने में दर्द उठा तो वह किसी तरह इमरजेंसी पहुंचा। यहां डॉक्टरों ने उसके हाथ में प्रो. राकेश वर्मा का पर्चा देखा तो सर्जरी विभाग जाने
को कह दिया। वह इलाज के लिए गुहार लगातार रहा लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। थोड़ी देर बाद उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद डॉक्टरों ने वार्ड ब्वाय की मदद से शव को अस्पताल के बाहर रख कर चादर से ढक दिया। उधर, शुक्रवार सुबह तकरीबन नौ बजे मीडियाकर्मी अस्पताल पहुंचे और पुलिस को
सूचना दी, तो अंदर से निकली मैट्रन ने संदीप के बैग से उसका पर्चा और बचे पैसे निकाल कर अपने पास रख लिए। बाद में पहुंची पुलिस शव को हैलट इमरजेंसी ले गई। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
इमरजेंसी में होना चाहिए था इलाज
ओपीडी में रोजाना 800-900 मरीज आते हैं। इनका परीक्षण कर परामर्श देता हूं। संदीप को भी दवाएं लिखी थीं। रात में उसकी हालत बिगड़ी तो इमरजेंसी में उसे इलाज मिलना चाहिए था।
प्रो. राकेश वर्मा, विभागाध्यक्ष सीवीटीएस कॉर्डियोलॉजी
इलाज न मिलना गंभीर मामला
गंभीर मरीज को इमरजेंसी में तत्काल इलाज मिलना चाहिए। उसे दूसरे विभाग में जाने के लिए कहना गलत है। इमरजेंसी के प्रभारी से बात करता हूं।
प्रो. विनय कृष्णा, डायरेक्टर, कॉर्डियोलॉजी