महोबा। ज्येष्ठ अमावस्या पर मंगलवार को बुंदेलों ने रामधुन के साथ गोरखगिरि पर्वत की परिक्रमा लगाई। इस दौरान पांच किलोमीटर लंबे परिक्रमा मार्ग में विराजमान सभी देवी-देवताओं से बुंदेलखंड में अच्छी बारिश कराने की प्रार्थना की। ताकि, यहां सूख रहे जलस्रोतों को संजीवनी मिल सके।
इस दौरान दिलीप जैन ने कहा कि वनवास के दौरान जब भगवान राम चित्रकूट में रहते थे तो अक्सर यहां भी आते थे। गोरखगिरि के ऊपर स्थित सीता रसोई इसका प्रमाण है। प्रवीण चौरसिया ने कहा कि गुरू गोरखनाथ ने 11वीं-12वीं शताब्दी में यहां तपस्या की। उन्हीं के नाम इस पर्वत का नाम गोरखगिरि पड़ा। इस मौके पर गयाप्रसाद, सिद्धे, अवधेश गुप्ता, महेंद्र चौरसिया, गुमान अनुरागी, प्रहलाद पुरवार, प्रवीण श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।