महोबा। सोलर आधारित सिंचाई व्यवस्था के लिए क्रियाशील की जा रही पीएम कुसुम योजना से किसानों का मोहभंग हो रहा है। इस योजना के लिए जिले को मिला लक्ष्य पूरा होना तो दूर, अभी तक 50 फीसदी आवेदन ही नहीं हुए हैं। अंशदान जमा करने वालों की संख्या तो इससे भी कम है।
खेतों की सिंचाई में बिजली की खपत कम करने के लिए सरकार ने सोलर को बढ़ावा देने के लिए पीएम कुसुम योजना की शुरुआत की थी। जिसमें दो हॉर्स पावर से लेकर किसान 10 हॉर्स पावर तक सोलर पंप की सुविधा दी जाती है। दो एचपी पंप के लिए चार इंच, तीन एवं पांच एचपी के लिए छह इंच, 7.5 एचपी और 10 एचपी के लिए आठ इंच की बोरिंग होना अनिवार्य है। इसके लिए किसान को 60 फीसदी का अनुदान भी दिया जाता है, लेकिन इसके बाद भी किसान इसमें रूचि नहीं ले पा रहे हैं। जिले को इस वित्तीय वर्ष में 650 सोलर पंप का लक्ष्य दिया गया था। जिसके सापेक्ष 250 किसानों ने आवेदन किया। जबकि अभी तक 191 किसानों ने ही अपना अंशदान जमा किया है।
- श्रीनगर के किसान रामदयाल का कहना है कि योजना का प्रचार-प्रसार न होना भी बड़ा कारण है। गांव से जुडे़ लेखपाल अथवा कृषि के स्थानीय विभागीय अधिकारी योजना की जानकारी नहीं देते हैं। जिससे किसान आवेदन करने से चूक जाते हैं।
भरवारा के किसान प्रीतम का कहना है कि योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी बाद में आती है। अगर यह सब्सिडी पहले ही मिल जाए तो किसान को इसका लाभ अधिक मिलेगा। किसान पर इतना पैसा नहीं होता कि वह पहले रुपये जमा कर दे।
- अधिक से अधिक किसानों को लाभांन्वित करने के लिए योजना का समुचित प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। योजना के तहत ज्यादा से ज्यादा आवेदन कराने के लिए प्रयास जारी है। - डॉ. अभय कुमार सिंह यादव, उपनिदेशक कृषि