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सूखे की दास्तां बयां कर रहे बंजर खेत

Sun, 03 Jan 2016 11:18 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, महोबा
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बुंदेलखंड में भयावह सूखे की स्थिति को खाली पड़े खेत यहां बयां कर रहे हैं। हालत यह है कि 92 फीसदी जमीन में बुवाई न होने से धूल उड़ रही है, जिससे किसानों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है।
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सिंचाई के साधन न होने से किसानों ने इस साल खेतों में जुताई बुवाई तक नहीं की है। अब परिवार चलाने के लिए वह महानगरों को पलायन कर रहे हैं।


जिले में 2.36 लाख हेक्टेयर भूमि पर खरीफ और रबी फसल की पैदावार की जाती है। इस साल सूखे के चलते किसानों ने जमीन में बुवाई तक नहीं की है। खेत खाली पड़े हैं। हरियाली भरे मौसम में खेतों में धूल उड़ रही है


मीलों दूर तक खेतों में हरियाली नजर नहीं आ रही है। इंसान के साथ- साथ पशु भी चारा पानी को परेशान हैं। पोखरों और तालाबों में पानी न होने से मवेशियों की मुश्किलें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। कुओं का जलस्तर नीचे खिसकने से किसानों ने खेतों में पलेवा तक नहीं किया है। यही वजह है कि इस साल आठ फीसदी खेतों में बुवाई हो सकी है।
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सर्द मौसम में लहलहाने वाले खेत इस साल बंजर पड़े हैं। पानी न मिलने से तमाम खेतों की जमीन फटने लगी है। हालत यह है कि किसान ने बोई हुई फसल को बचाने के लिए खेतों में डेरा जमा लिया है और रात दिन खेतों में परिवार सहित पड़े हैं, उन्हें अब अन्ना पशुओं का डर सता रहा है।


हैंडपंपों ने दिया जवाब - जिले में तेजी से बढ़ रहे सूखे के संकट को देखते हुए तमाम हैंडपंप ड्राई हो गए है। इन हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है, जिससे पानी का संकट बढ़ गया है। हैंडपंपों के पास मवेशियों के लिए बनाई गई चरही में पानी नहीं पहुंच रहा है।


प्रशासन ने ड्राई हैंडपंपों के रिबोर कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे इंसानों के साथ- साथ पशुओं को 24 घंटे पीने का पानी मयस्सर हो सके।


अन्ना पशु बने किसानों के लिए मुसीबत - सूखे के चलते जहां लोग खानपान को परेशान हैं। वहीं थोड़ी बहुत जमीन पर बोई गई फसल को बचाने के लिए किसानों को दिन रात मशक्कत करनी पड़ रही है।


हालत यह है कि भूखे प्यासे भटक रहे अन्ना पशु कहीं भी हरियाली देखते हुए तारबाड़ी फांदकर खेतों की तरफ दौड़ पड़ते हैं। जिससे किसानों को थोड़ी बहुत बची फसल को सुरक्षित करना मुश्किल हो गया है।
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