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महंगाई की मार: 1700 रूपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए भूसे के दाम

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पनवाड़ी ( महोबा )। भूसे के दाम रोजाना बढ़ते जा रहे हैं। रविवार को बाजार में भूसा 1700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिका। भूसे के बढ़े दामों के कारण अब खेतों में पराली दिखाई नहीं दे रही है। यह
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पिछले साल की तुलना में इस बार गेहूं की बुवाई का रकबा कम रहा है। इसलिए भूसे के दामों में तीन गुना उछाल आया है। भूसे के दाम 1700 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गए हैं। जिसके कारण इस सीजन में पराली जलाने की घटनाएं सुनाई नहीं दे रही हैं। भूमिहीन, मजदूर वर्ग अनाज की बजाय भूसे के लिए कटाई कर रहे है। वहीं भूसा कारोबारी मटर, चना, मसूर का भूसा किसानों से 800-1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद कर महंगे दामों में बेच रहे हैं।
गेहूं काटने पर मिलेगा भूसा
बडे़ किसान मजदूरों से गेहूं की फसल कटवाते हैं उसके बदले उन्हें मेहनताना देते हैं। जिसमें उन्हें अनाज दिया जाता था लेकिन इस बार मजदूर गेहूं की बजाय भूसे की मांग कर रहे हैं। गीता निवासी पनवाड़ी ने बताया कि उसके पास आधा दर्जन मवेशी हैं। भूसा महंगा होने के कारण किसान के खेत मे लगा गेहूं काटने पर इसके बदले भूसा मिलेगा। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार गेहूं कम बोया गया है।
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खड़ी फसल में ही तय हो रहे भूसे के दाम
इस बार भूसे के दाम 1700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। खेतों में काम कर रहे शहंशाह ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में गेहूं कम बोया गया है। जिसके कारण भूसा महंगा हो गया है। पिछले वर्ष 10 बीघा में गेहूं की बुवाई की थी इस बार पांच बीघा में है। अभी कटाई भी नही हुई और खरीददार खड़ी फसल में ही भूसे की मांग कर रहे हैं।
-किसान राम सिंह यादव ने बताया कि उनके पास गाय और भैंस हैं। चार बीघा में गेहूं बोया है। साल भर के लिए जानवरों को खिलाने के लिए गेहूं का भूसा खरीदना है लेकिन भूसा बहुत महंगा है।
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- जानकी ने बताया के भूसा महंगा होने पर चोरी भी बढ़ गई है। भूसे के लिए रात-रात भर जागना पड़ रहा है। एक भूसे का ढेर चोरी हो गया है।
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