प्रदेश सरकार ने शहर की तरह गांव को भी साफ- सुथरा बनाने के लिए जिले की 247 ग्राम पंचायताें में करीब 497 पंचायत कर्मचारियाें की तैनाती की थी। लेकिन ज्यादातर ग्राम पंचायत कर्मचारी तैनाती स्थल पर न रहकर कभी कभार ही ग्रामीण अंचलाें में सफाई करने पहुंचते हैं। इतना ही नहीं कुछ कर्मचारी अपने स्थान पर चाकर लगाकर काम करवाते है। वहीं कुछ हफ्ते दस दिन में आकर सफाई करते है। जिससे गांवाें की सफाई तो दूर प्राथमिक स्कूलों की सफाई भी बच्चों को करनी पड़ती है। जिलें में कार्यरत 497 पंचायत कर्मचारियों की सैलरी पर सरकार का 8.40 करोड़ रुपये सालाना खर्च होता है। जिसके बाद भी गांव की सफाई व्यवस्था जस का तस बनीं हुई है। ग्रामीण अंचलाें में जगह-जगह गंदगी और नालियों का गंदा पानी बह रहा है। जिससे ग्रामीणों का निकलना दूभर हो गया है। ग्राम प्रधानों और लोगों द्वारा इसकी शिकायत करने के बाद भी सुधार नहीं हो रहा है।
तनख्वाह शासन से और नौकरी साहब की
ग्राम पंचायताें को साफ करने के उद्ेश्य से तैनात सफाई कर्मी तनख्वाह भले ही शासन से पा रहे हों। लेकिन नौकरी साहब के यहां कर रहे हैं। इनमें से कोई खाना बना रहा है तो कोई कंप्यूटर चला रहा है। इतना ही नहीं साहब के रहमो करम में चल रहे सफाई कर्मियों को किसी प्रकार का डर भी नहीं है।
सफाई कर्मचारी गांव में नियमित सफाई करने जाते हैं। यदि कोई सफाई कर्मी नहीं जाता है और शिकायत मिलती है। तो जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रामजियावन, डीपीआरओ।