महोबा। अपर जिला सत्र न्यायाधीश रामकिशोर शुक्ला ने दुष्कर्म के मामले में बेटे को दस साल की सजा सुनाई और अपहरण के मामले में उसकी मां को पांच साल की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों पर जुर्माना भी ठोंका। अदालत ने मां-बेटे को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया है।
कोतवाली चरखारी के एक ग्राम निवासी किशोरी का ग्राम कुराराडांग निवासी छोटू उर्फ शादाब व उसकी मां मुन्नी उर्फ नूरजहां ने रास्ते में 23 मार्च 2017 को सुबह 11 बजे अपहरण कर लिया था। इसके बाद शादाब किशोरी को लखनऊ ले गया। जहां पर उसे करीब एक माह तक रखा। उसके बाद किशोरी को लेकर चरखारी से होते हुए अपने गांव जा रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस ने उसे चरखारी में ही किशोरी के साथ दबोच लिया। घटना की रिपोर्ट पीड़िता के पिता ने कोतवाली चरखारी में दुष्कर्म, अपहरण और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज कराई थी।
अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने गुरुवार को दोनों पक्षों के गवाह और बहस सुनने के बाद दुष्कर्म के मामले में शादाब को दस साल की सजा सुनाई और दस हजार रुपये का जुर्माना ठोंका। अपहरण के मामले में मां-बेटे को पांच-पांच साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना ठोंका। सरकार पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी करते हुए अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी दिनेश सिंह ने बताया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।