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मानसिक रोग छिपाएं नहीं, इलाज को आगे बढ़ें: सीजेएम

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गोष्ठी में बोलते सीजेएम - फोटो : MAHOBA
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महोबा। मानसिक रोग भी अन्य बीमारियों की तरह है। इसे छिपाए नहीं बल्कि इलाज के लिए आगे बढ़ें। आवेश में आकर लोग आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं। मामूली विवाद भी आत्महत्या का कारण हो सकता है। यह बात मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) निर्दोष कुमार ने कही। वे विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित गोष्ठी व स्वास्थ्य शिविर में में बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि मुकदमों में मनोरोगियों को विधिक सहायता दी जाती है। उनके परिवार का कोई भी सदस्य व साथी पैरवी कर सकता है। डीएम अवधेश कुमार तिवारी ने कहा कि संयुक्त परिवार टूट रहे हैं। वर्तमान में आजीविका एवं कार्य की अधिकता, बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा का दबाव, सामाजिक कलह, आर्थिक समस्या सहित कई उदाहरण हैं, जिनके कारण मानसिक स्वास्थ्य को खतरा होता है। मेडिकल कॉलेज झांसी से आए मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने मानसिक रोगों के बारे में बताया। कहा कि ‘आत्महत्या रोकने के लिए मिलकर काम करें’ इस थीम पर सबके सहयोग की जरूरत है। माता-पिता अपने बच्चों के साथ सामंजस्य बनाएं। उनसे दोस्ती का रिश्ता रखें।
गोष्ठी के बाद स्वास्थ्य शिविर में 113 मानसिक रोगियों का परीक्षण हुआ। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. आदित्य कुमार वर्मा, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह व साइक्रेटिस्ट सोशल वर्कर प्रेमदास, अंकिता गुप्ता ने रोगियों के साथ उनके परिजनों की भी काउंसिलिंग की। इनमें सिरदर्द व माइग्रेन के 13, डिप्रेशन के 21 समेत विभिन्न मानसिक रोगों के मरीज शामिल रहे। इस दौरान 5 मंदबुद्धि बच्चों के प्रमाण पत्र जारी किए गए। मरीजों को सलाह के साथ दवाइयां भी दी गई। इस अवसर पर अपर जिला जज अवनीश कुमार राय, सीएमओ डॉ. सुमन, एसीएमओ डॉ. सुरेंद्र प्रसाद व डॉ. सज्जन कुमार, डॉ. दिवाकर प्रताप सिंह, शिव कुमार, राजेश प्रजापति, जयंत कुमार, अमित मिश्रा, विधिक प्राधिकरण सदस्य विश्वनाथ त्रिपाठी, अधिवक्ता संघ महामंत्री कृष्ण गोपाल द्विवेदी आदि ने सहयोग दिया।
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मानसिक रोग के यह हैं लक्षण
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. आदित्य प्रकाश वर्मा का कहना है कि मानसिक रोग के और भी लक्षण होते हैं। नींद न आना, चिंता, घबराहट, तनाव होना, काम में मन न लगना, आत्महत्या के विचार आना, उदास रहना, भूत प्रेत-देवी देवता आदि की छाया का भ्रम होना, याददाश्त की कमी होना, बुद्धि का कम विकास होना, किसी प्रकार का नशा करना, मिर्गी व बेहोशी के दौरे आना इत्यादि। परिवार के किसी भी व्यक्ति में यह सभी लक्षण पाए जाने पर उसे स्वास्थ्य इकाई तक जरूर जाएं।
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