अखिलेश चंसौरिया
महोबा। मानवता आज भी जिंदा है, इसकी मिशाल शहर की समाजसेवी शकीला बानो ने पेश की है। महिलाओं के हक व अधिकार के लिए संघर्ष करने वाली शकीला ने रेलवे स्टेशन के पास अधेड़ महिला की रोने की आवाज सुन वजह जानने पहुंच गई। महिला ने अपना दर्द बयां किया तो शकीला की आंखें नम हो गईं और वह महिला को अपने घर ले आईं। महिला की आंख का आपरेशन कराया, उसका पूरा खर्च वहन किया। अब भी शकीला इस महिला की सेवा कर देखरेख कर रहीं हैं।
मध्यप्रदेश के जनपद छतरपुर के ग्राम दिदवारा निवासी गीता देवी (55) पत्नी स्व. तोताराम की पांच वर्ष पहले मौत हो गई थी। कोई संतान न होने से ससुराल वालों ने उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद वह दिल्ली के बजईबाग में मेहनत मजदूरी का काम करके अपना पेट पालने लगी। कोरोना संक्रमण के चलते अप्रैल में वह श्रमिक स्पेशल ट्रेन से महोबा आ गई और रेलवे स्टेशन के पास चबूतरे पर सामान रख लिया। चार माह से महिला रेलवे स्टेशन में आने वाली मालगाड़ी से नमक की बोरियां उतरने के दौरान गिरने वाले नमक को एकत्र कर किराना दुकान में बेंच देती थी। उससे मिलने वाले रुपये से खाना लेकर पेटभर लेती थी। एक सप्ताह पहले उसको एक आंख से दिखना बंद हो गया। इससे वह भूख व दर्द के चलते रेलवे स्टेशन के समीप ही बैठकर रोने लगी।
इस दौरान सड़क से गुजर रहीं शहर के बजरिया निवासी समाजसेविका व महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष शकीला बानो ने जब महिला को इस हाल में देखा तो उनके कदम रुक गए। उन्होंने बेसहारा महिला से उसका दर्द समझा तो उन्होंने मदद का संकल्प लिया। बेसहारा को सहारा देते हुए शकीला उसे अपने घर ले गई। बाद में एक प्राइवेट अस्पताल में उपचार कराया। आंख के आपरेशन में 10 हजार का खर्च वहन करने के बाद अब शकीला उसे अपने घर में रखकर देखभाल कर रही है। हिंदू मुस्लिम एकता व आपसी भाईचारे के साथ मानवता की मिशाल पेश करने वाली शकीला बानो के इस कार्य की लोग प्रशंसा कर रहे हैं।
जिंदगी भर अपने साथ रखेगी शकीला
बेसहारा महिला को अपनाने वाली शकीला ने गीता देवी को अपने साथ रखने का फैसला किया है। शकीला ने बताया कि उनके मकान के बगल में प्लाट है। जहां एक कमरा बना है। इस कमरे में गीता देवी के रहने को कहा गया है। वह उनकी पूरी देखरेख व खानपान का का ख्याल रखेगी।
अचानक रुकी महिला उसके लिए बन गई मसीहा
सड़क पर दर्द व भूख से रोती बेसहारा महिला नेे आंख के आपरेशन के बाद बताया कि एक सप्ताह पहले सड़क से गुजर रही महिला अचानक रुकी जो उसके लिए मसीहा बन गई। आज उसके मन में इतनी खुशी है जो उसे आज तक नहीं मिली। एक अपरचित महिला ने उसे न सिर्फ सहारा दिया बल्कि पूरी देखरेख व खानपान का ख्याल रखा जा रहा है। वह यह कर्ज अदा नही कर पाएगी। (संवाद)