महोबा। जिला महिला अस्पताल में जीपीएफ खाते से 85 लाख रुपये का गबन जिस तरह किया गया, उसमें कई अधिकारियों और कर्मचारियों के मिले होने की आशंका है। जांच में कई अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है। कूटरचित दस्तावेज लगाकर लिपिक ने स्वयं के जीपीएफ खाते समेत कुछ अन्य कर्मचारियों के खातों से रकम निकाल ली जबकि उसके जीपीएफ खातों में उतनी रकम ही नहीं थी। मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के बाद जांच शुरू हो गई है।
जिला महिला अस्पताल में तैनात लिपिक ने अपने जीपीएफ खाते व एक-दो अन्य कर्मियों के खातों में कम रकम होने के बाद भी कूटरचित दस्तावेज लगाकर अलग-अलग किस्तों में 85 लाख रुपये निकाल लिए। सरकारी धन के गबन का यह मामला ऑडिट में पकड़ा गया जिसके बाद से लिपिक अभिलेख लेकर फरार है। विभाग के चालक अंबिका के जीपीएफ खाते से करीब नौ लाख रुपये निकलने की बात सामने आई है।
चालक ने बताया कि उसने लिपिक से बच्चे के स्कूल में प्रवेश के लिए जीपीएफ की धनराशि निकालने की चर्चा की थी। इसके लिए किसी प्रकार का आवेदन नहीं दिया। मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के बाद अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. अभय प्रताप ने सीएमएस डॉ. रमाकांत चौरिहा से रिपोर्ट तलब कर लिपिक से रिकवरी के आदेश दिए हैं।
विभागीय सूत्रों की मानें तो जीपीएफ खातों से इतना बड़ा गबन अकेले लिपिक नहीं कर सकता है। खाते में कम रुपया होने के बाद भी कूटरचित दस्तावेज लगाकर अधिक रुपये निकालने के मामले में कई कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं। यदि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हुई तो कई लोगों के नाम सामने आएंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनय कुमार का कहना है कि मामले में एफआईआर के निर्देश दिए गए हैं। महिला अस्पताल के लिपिक ने जीपीएफ खाते में कम रकम होने के बाद भी अधिक धन निकाल लिया। इसमें कई लोगों के मिले होने की आशंका है। जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।