जिले में सूखे के चलते पशुओं के सामने चारा भूसा का संकट छा गया है। पशुओं को भूसा चारा का इंतजाम न होता देख पशु पालक औने-पौने दामों में पशुओं को बेच रहे हैं। हालत यह है कि 80,000 रुपये में बिकने वाली भैंस 40,000 से 50,000 हजार रुपये में बिक रहीं हैं। चारे का इंतजाम न होने से जानवरों के खरीददार नहीं मिल रहे हैं। जबकि पशु बाजार में मवेशियों का मेला सा लग रहा है।
मालूम हो कि दो सालों से सूखा के चलते फसलों के बर्बाद होने से जहां अनाज की कीमतें बढ़ गई हैं। वहीं पशुपालकाें के सामने जानवरों को भूसा चारा का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। जिसके चलते पशुपालक मजबूरन जानवरों को सस्ते दामों पर बेच रहे हैं। भूसा चारा तो दूर जानवरों को खेतों और जंगल में हरियाली नजर नहीं आ रही है। इससे जानवर धूल चाट रहे हैं। हफ्ताें से चारा न मिलने से लगातार पशुओं की मौत हो गई। जानवरों के लिए चारे का इंतजाम न होने से पशुपालक जानवरों को बेच रहे है। बसौरा निवासी वजीर अहमद का कहना कि जानवरों के लिए चारा और घास का इंतजाम न होेने से मजबूरन सस्ती कीमतों पर बेचे जा रहे हैं।
भूसा चारा न होने से पशु आवारा छोड़े
जिले में सूखे के चलते पशुओं के खान पान की व्यवस्था न होने से पशुपालकाें ने पशुओं को छुट्टा छोड़ दिया है। ये अन्ना पशु किसानों के लिए मुसीबत बन गए हैं। चारा और भूसा की तलाश में जानवर जंगलों में भटक रहे हैं। पशुपालक पशुआें का दूध निकालने के बाद उन्हें आवारा छोड़ देतेे हैं। जिससे अन्ना पशु खेतों में बोई गई थोड़ी बहुत फसल को बर्बाद करने में जुटे हुए हैं।
भूसा न मिलने से दूध की कीमतें बढ़ी
सूखे के चलते जानवरों की पूछ खत्म हो गई है। चारा और भूसा न होने से दूध की कीमत बढ़ गई है। 40 रुपये लीटर बिकने वाला दूध 60 रुपये लीटर पहुंच गया है। पशु पालकों का कहना है कि एक तो भूसा ढूंढे नही मिल रहा। वहीं चारा न होने से भूसे के दाम दो गुना हो गए है। जिससे मजबूरन दूध की कीमतें बढ़ानी पड़ी है।