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जेल में निरुद्घ बंदी ने ब्लेड से काटी गर्दन, हालत गंभीर

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महोबा। दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट में निरुद्ध बंदी ने शुक्रवार को जेल के अंदर ब्लेड से गर्दन काट ली। गंभीर हालत में बंदी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बंदी का आरोप है कि जेल के अंदर कई माह से उसे भरपेट भोजन नहीं दिया गया। आए दिन मारपीट किए जाने से आहत होकर उसने आत्महत्या की कोशिश की। जिलाधिकारी ने तीन दिन के अंदर घटना की रिपोर्ट मांगी है।
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जनपद हमीरपुर के छानी बंधा गांव निवासी जीतेंद्र (19) किशोरी से दुष्कर्म के मामले में 30 अगस्त 2020 से उपकारागार महोबा में बंद है। शुक्रवार को जीतेंद्र जेल के अंदर बाल कटिंग कक्ष में पहुंचा और नाखून काटने की बात कह ब्लेड ले आया। इसके बाद उसने धारदार ब्लेड से गले में दो बार प्रहार कर जान देने की कोशिश की।
घायल बंदी का आरोप है कि जेल में कुछ बंदियों को मनमाफिक भोजन दिया जा रहा है जबकि उसे भरपेट भोजन नहीं मिल रहा। यहां तक कि नहाने के लिए साबुन की जगह मिट्टी का प्रयोग करना पड़ रहा है। विरोध करने पर आए दिन अन्य बंदियों व कर्मचारियों द्वारा मारपीट की जाती है। एक वर्ष में परिवार का कोई सदस्य उससे मिलने नहीं आया। रुपये के अभाव में उसे जेल में कोई सुविधा नहीं मिलती है। जिला अस्पताल के डॉ. गुलशेर अहमद ने बताया कि बंदी द्वारा ब्लेड से दो बार प्रहार किए जाने से गहरे घाव हुए हैं। हालांकि स्थिति खतरे से बाहर है।
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कोट
बंदी जितेंद्र दुष्कर्म के मामले में करीब एक वर्ष से जेल में निरुद्घ है। परिजनों के मिलने न आने से युवक परेशान रहता था। मैंने स्वयं परिजनों से बात की लेकिन कोई मिलने नहीं आया। जिससे नाराज होकर युवक ने बाल कटिंग कक्ष से नाखून काटने के बहाने ब्लेड लाकर स्वयं को घायल कर लिया। मारपीट व अन्य आरोप बेबुनियाद हैं।
भोलानाथ मिश्रा, जेलर उप कारागार, महोबा
175 की क्षमता वाली जेल में 475 बंदी व कैदी
महोबा। उपकारागार महोबा में क्षमता से ढाई गुना बंदी व कैदी निरुद्घ है। 175 बंदियों की क्षमता है लेकिन 475 बंदी व कैदी निरुद्घ है। जिससे दिक्कत आ रही है। जेलर ने बताया कि बजट की कमी है। जेल में 32 कैमरे चल रहे हैं जबकि सूत्रों की माने तो अधिकांश कैमरे कई बार काम करना बंद कर देते हैं।
इंसेट
अफसरों के निरीक्षण के दौरान सबकुछ मिलता है चकाचक
महोबा। उप कारागार में अफसरों के निरीक्षण के दौरान सबकुछ चकाचक मिलता है। उनके जाते ही व्यवस्थाएं फिर पुराने ढर्रे पर संचालित हो जाती है। एक सप्ताह पहले डीएम, एसपी व जिला जज ने उपकारागार का निरीक्षण किया था। जिसमें सबकुछ ठीकठाक पाया गया था। अफसरों ने जेल के अंदर किसी भी प्रकार की प्रतिबंधित सामग्री न मिलने की जानकारी दी थी लेकिन अस्पताल आए घायल बंदी ने जेल की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है।
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