अंधाधुंध बिजली कटौती से लोगों की नींद हराम हो गई
है। शहर से लेकर देहात तक लोग कटौती से त्रस्त हैं। उमस भरी गर्मी में लोग
दिन तो किसी तरह काट लेते हैं, किंतु रात में बिजली न होने से सो नहीं पा
रहे हैं। इससे पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। व्यापारियों का
कारोबार चौपट हो रहा है।
इन दिनों हो रही अघोषित बिजली कटौती से
लोग त्रस्त हैं। बिजली ने दिन का चैन और रात की नींद छीन ली है। शाम सात
बजे से बिजली कटौती का सिलसिला शुरू हो जाता है। रात 11 बजे बिजली आती है।
इसके बाद रात दो बजे से सुबह पांच बजे तक बिजली गुल रहती है।
सुबह
तीन घंटे बिजली देने के बाद आठ बजे फिर बिजली काट ली जाती है। इसके बाद दस
बजे आती है। कुछ घंटे बाद फिर बिजली काट ली जाती है। बिजली की मनमानी कटौती
से शहर से लेकर देहात तक लोग त्रस्त हैं। उमस भरी गर्मी में लोग टहलकर रात
बिताने को मजबूर हैं। रात में सिर्फ तीन घंटे बिजली मिल रही है।
अघोषित
कटौती से बिजली पर निर्भर कारोबार पूरी तरह चौपट हो गया है। दिन में कम
बिजली मिलने से दुकानदार समय से ग्राहकों के आर्डर पूरे नहीं कर पा रहे
हैं। कटौती से खफा लोग प्रशासन से लेकर प्रतिनिधियों तक को इसके लिए
जिम्मेदार बता रहे हैं।
संबधित अधिकारी भी अघोषित कटौती पर सही
जवाब नहीं दे रहे हैं। कुलपहाड़ प्रतिनिधि के अनुसार अंधाधुंध बिजली कटौती
से लोगों में गुस्सा है। महज दस घंटे बिजली मिल रही है। लाखन सिंह यादव,
शिव कुमार सोनी, गुलजारी लाल, हरिशंकर ने एसडीएम कुलपहाड़ को शिकायत पत्र
देकर कहा कि यदि बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार न हुआ तो बिजली बिल अदा
नहीं करेंगे।
खरेला, चरखारी, बेलाताल, पनवाड़ी, महोब कंठ, अजनर,
श्रीनगर, कबरई, खन्ना प्रतिनिधियों के मुताबिक बिजली कटौती से इलाके के लोग
बेहाल हैं।