संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। सेप्सिस या रक्तपूर्तिता एक गंभीर रक्त संबंधित रोग है। यह कमजोर प्रतिरोधक शक्ति वाले लोगों में आसानी से हो सकती है। इससे ग्रस्त होने की संभावनाएं तब और बढ़ जाती है, जब शरीर पहले से ही किसी अन्य संक्रमण जनित रोग से जूझ रहा हो। कोरोना संक्रमण या दूसरे किसी संक्रमण के रोगियों में सेप्सिस होने की संभावनाएं बहुत बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य विभाग के जिला सलाहकार डॉ. दिवाकर प्रताप सिंह ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक वर्ष विश्व में होने वाली मृत्यु के आंकड़ों में 20 प्रतिशत मृत्यु का कारण सेप्सिस है। समय रहते लक्षण पहचान कर निदान करना आवश्यक है अन्यथा देर होने से शरीर के अंग (लीवर, किडनी आदि) काम करना बंद कर सकते हैं। यह परिस्थिति रोगी के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
उनका कहना है कि सेप्सिस हो जाने पर शुरुआती स्टेज में शरीर में पनप रहे संक्रमण को एंटीबायटिक्स द्वारा खत्म कर इस रोग को फैलने से रोका जा सकता है लेकिन यदि लक्षण के प्रति सतर्क होकर तुरंत उपचार नहीं कराया गया तो यह गंभीर हो सकता। ऐसे किसी भी लक्षण के दिखते ही बिना लापरवाही बरते चिकित्सक से संपर्क करें ताकि चिकित्सक अविलंब रक्त जांच कर स्थिति का पता लगा सकें और इलाज शुरू कर सकें।