दैवी आपदाओं ने पान किसानों की कमर तोड़ दी है। करारेपन के लिए देश विदेश में मशहूर महोबा का देसावरी पान इस बार लोगों की पहुंच से दूर हो गया है। रविवार को तेज आंधी और ओलावृष्टि से पान बरेजे बर्बाद हो गए हैं।
पान किसानों को इस आपदा से लाखों रुपये की क्षति पहुंची है। पूरी तरह तबाह हो चुके पान किसान अपनी बदहाली की दास्तान बताते बताते सिहर उठते हैं।
जिले में दैवी आपदा के चलते लगातार बर्बाद हो रही पान की खेती से पान के पुश्तैनी किसान पहले ही किनारा कर चुके हैं। यह पान की खेती छोड़ कर दूसरा काम करने लगे हैं। यही वजह रही कि इस बार पान की खेती का रकबा 500 से घटकर 70 एकड़ रह गया है।
महज 10 फीसदी में ही पान की खेती सिमट गई। शहर में इस समय दो दर्जन पान किसान ही बरेजे लगाकर खेती कर रहे हैं। रविवार को आंधी और ओलों ने पान बरेजे जमींदोज कर दिए हैं। इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
शहर के मोहल्ला इमलीबरा निवासी रूपेंद्र चौरसिया, शेखनपुरा निवासी नरेशचंद्र चौरसिया, नवल चौरसिया, राकेश चौरसिया, जगदीश चौरसिया पान किसानों ने बताया कि आंधी तूफान से दर्जनों पान बरेजे जमींदोज हो गए हैं। इससे बरेजे में लगे लाखों रुपये की कीमत के देसी पान दबकर खराब हो गए।
पुरानों के साथ साथ नए बरेजाें को भी तूफान लील गया। इन्हाेंने बताया कि बड़ी मुश्किल से सूखे के बाद पान बेल खरीदकर बरेजे तैयार किए थे। कुदरत की मार से अब दो जून की रोटी के लाले पड़ गए हैं।
पान किसानों के परिवार के भरण पोषण का यही एक साधन था। बरेजे नष्ट हो जाने से पान किसानों के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट गया है। यह अपना दर्द बताते बताते फफक पड़ते हैं। किसानों ने बताया कि अब शौकीन लोग देसावरी पान खाने के लिए तरस जाएंगे।